Thursday, 5 March 2026

कविता. ५८०२. उम्मीद आवाज से जुडकर।

                          उम्मीद आवाज से जुडकर।

उम्मीद आवाज से जुडकर इशारा दिलाती है कदमों को अल्फाजों की दुनिया जज्बात दिलाती है अरमानों संग पहचान दिलाती है।

उम्मीद आवाज से जुडकर लहर दिलाती है आशाओं को बदलावों की पुकार दास्तान दिलाती है धाराओं संग पहचान दिलाती है।

उम्मीद आवाज से जुडकर रोशनी दिलाती है अंदाजों को सपनों की सरगम सोच दिलाती है नजारों संग पहचान दिलाती है।

उम्मीद आवाज से जुडकर कोशिश दिलाती है लम्हों को एहसासों की तलाश अरमान दिलाती है अदाओं संग पहचान दिलाती है।

उम्मीद आवाज से जुडकर समझ दिलाती है उजालों को दिशाओं की महफिल सरगम दिलाती है राहों संग पहचान दिलाती है।

उम्मीद आवाज से जुडकर आहट दिलाती है सपनों को लम्हों की कहानी अफसाना दिलाती है दिशाओं संग पहचान दिलाती है।

उम्मीद आवाज से जुडकर सोच दिलाती है इशारों को अफसानों की सुबह नजारा दिलाती है खयालों संग पहचान दिलाती है।

उम्मीद आवाज से जुडकर उमंग दिलाती है दास्तानों को इशारों की सौगात पुकार दिलाती है अल्फाजों संग पहचान दिलाती है।

उम्मीद आवाज से जुडकर लम्हा दिलाती है उजालों को कदमों की आस अरमान दिलाती है तरानों संग पहचान दिलाती है।

उम्मीद आवाज से जुडकर सपना दिलाती है राहों को दिशाओं की कहानी अंदाज दिलाती है उजालों संग पहचान दिलाती है।

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कविता. ५८०२. उम्मीद आवाज से जुडकर।

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