Tuesday, 24 March 2026

कविता. ५८२१. सरगम संग आशाओं की

                           सरगम संग आशाओं की।

सरगम संग आशाओं की महफिल पहचान दिलाती है अंदाजों को सपनों की पुकार एहसास सुनाती है किनारों की सोच देकर जाती है।

सरगम संग आशाओं की सौगात तलाश दिलाती है तरानों को बदलावों की सुबह उम्मीद सुनाती है नजारों की सोच देकर जाती है।

सरगम संग आशाओं की आवाज अफसाना दिलाती है इशारों को जज्बातों की रोशनी खयाल दिलाती है धाराओं की सोच देकर जाती है।

सरगम संग आशाओं की उम्मीद नजारा दिलाती है उजालों को अरमानों की उमंग मुस्कान दिलाती है राहों की सोच देकर‌ जाती है।

सरगम संग आशाओं की लहर कोशिश दिलाती है नजारों को अफसानों की समझ इरादा दिलाती है लहरों की सोच देकर जाती है।

सरगम संग आशाओं की परख अल्फाज दिलाती है अदाओं को दास्तानों की पहचान नजारा दिलाती है आवाजों की सोच देकर जाती है।

सरगम संग आशाओं की कहानी जज्बात दिलाती है दिशाओं को खयालों की आस तराना दिलाती है एहसासों की सोच देकर जाती है।

सरगम संग आशाओं की दास्तान बदलाव दिलाती है धाराओं को कदमों की समझ पुकार दिलाती है अरमानों की सोच देकर जाती है।

सरगम संग आशाओं की मुस्कान महफिल दिलाती है राहों को अंदाजों की अहमियत कहानी दिलाती है दास्तानों की सोच देकर जाती है।

सरगम संग आशाओं की उमंग इशारा दिलाती है अफसानों को अदाओं की धून अल्फाज दिलाती है इरादों की सोच देकर जाती है।

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कविता. ५८२३. इरादों को एहसासों की।

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