Thursday, 12 March 2026

कविता. ५८०९. उजालों की समझ अक्सर।

                         उजालों की समझ अक्सर।

उजालों की समझ अक्सर अफसाना सुनाती है खयालों को सपनों की सुबह एहसास दिलाती है लम्हों की कहानी बदलाव दिलाती है।

उजालों की समझ अक्सर मुस्कान सुनाती है तरानों को अफसानों की सोच जज्बात दिलाती है राहों की अहमियत बदलाव दिलाती है।

उजालों की समझ अक्सर तलाश सुनाती है कदमों को अल्फाजों की दुनिया पहचान दिलाती है नजारों की कोशिश बदलाव दिलाती है।

उजालों की समझ अक्सर पहचान सुनाती है किनारों को अरमानों की रोशनी अंदाज दिलाती है लहरों की आहट बदलाव दिलाती है।

उजालों की समझ अक्सर दास्तान सुनाती है इशारों को जज्बातों की कहानी अल्फाज दिलाती है अदाओं की धून बदलाव दिलाती है।

उजालों की समझ अक्सर आवाज दिलाती है दिशाओं को तरानों की सौगात इरादा दिलाती है एहसासों की सोच बदलाव दिलाती है।

उजालों की समझ अक्सर उम्मीद दिलाती है आशाओं को अल्फाजों की दुनिया कोशिश दिलाती है धाराओं की सरगम बदलाव दिलाती है।

उजालों की समझ अक्सर सोच दिलाती है इशारों को जज्बातों की पुकार अफसाना दिलाती है कदमों की सुबह बदलाव दिलाती है।

उजालों की समझ अक्सर उमंग दिलाती है नजारों को दास्तानों की तलाश खयाल दिलाती है अरमानों की कोशिश बदलाव दिलाती है।

उजालों की समझ अक्सर कोशिश दिलाती है दिशाओं को राहों की अहमियत लहर दिलाती है अंदाजों की पहचान बदलाव दिलाती है।


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कविता. ५८०९. उजालों की समझ अक्सर।

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