Friday, 6 March 2026

कविता. ५८०३. दिशाओं की महफिल अक्सर।

                        दिशाओं की महफिल अक्सर।

दिशाओं की महफिल अक्सर सपनों को अंदाजों संग एहसास सुनाती है किनारों को कदमों की पहचान से अफसाना दिलाती है।

दिशाओं की महफिल अक्सर नजारों को लहरों संग आवाज सुनाती है आशाओं को लम्हों की अहमियत से अफसाना दिलाती है।

दिशाओं की महफिल अक्सर जज्बातों को राहों संग मुस्कान सुनाती है खयालों को इशारों की समझ से अफसाना दिलाती है।

दिशाओं की महफिल अक्सर अल्फाजों को सपनों संग तराना सुनाती है अरमानों को धाराओं की आस से अफसाना दिलाती है।

दिशाओं की महफिल अक्सर दास्तानों को आशाओं संग लहर सुनाती है आवाजों को तरानों की सरगम से अफसाना दिलाती है।

दिशाओं की महफिल अक्सर खयालों को उजालों संग परख सुनाती है बदलावों को उम्मीदों की कहानी से अफसाना दिलाती है।

दिशाओं की महफिल अक्सर किनारों को अंदाजों संग सोच सुनाती है एहसासों को दास्तानों की कोशिश से अफसाना दिलाती है।

दिशाओं की महफिल अक्सर राहों को बदलावों संग पहचान सुनाती है नजारों को लम्हों की सौगात से अफसाना दिलाती है।

दिशाओं की महफिल अक्सर आशाओं को सपनों संग कोशिश सुनाती है जज्बातों को आवाजों की धून से अफसाना दिलाती है।

दिशाओं की महफिल अक्सर उजालों को लम्हों संग तलाश सुनाती है लहरों को सपनों की सौगात से अफसाना दिलाती है।


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कविता. ५८०५. दास्तान की कोशिश संग।

                           दास्तान की कोशिश संग। दास्तान की कोशिश संग अरमानों को आस दिलाती है राहों को एहसासों की तलाश सुनाती है आशाओं की सो...