Sunday, 8 March 2026

कविता. ५८०५. दास्तान की कोशिश संग।

                           दास्तान की कोशिश संग।

दास्तान की कोशिश संग अरमानों को आस दिलाती है राहों को एहसासों की तलाश सुनाती है आशाओं की सोच दिलाती है।

दास्तान की कोशिश संग लहरों को सपना दिलाती है आवाजों को धाराओं की समझ सुनाती है उजालों की सोच दिलाती है।

दास्तान की कोशिश संग इशारों को अंदाज दिलाती है उम्मीदों को बदलावों की पुकार सुनाती है जज्बातों की सोच दिलाती है।

दास्तान की कोशिश संग तरानों को बदलाव दिलाती है नजारों को किनारों की मुस्कान सुनाती है इरादों की सोच दिलाती है।

दास्तान की कोशिश संग खयालों को रोशनी दिलाती है दिशाओं को सपनों की आहट सुनाती है खयालों की सोच दिलाती है।

दास्तान की कोशिश संग आशाओं को अल्फाज दिलाती है लहरों को अफसानों की उमंग सुनाती है लम्हों की सोच दिलाती है।

दास्तान की कोशिश संग नजारों को पहचान दिलाती है जज्बातों को अरमानों की सुबह सुनाती है आवाजों की सोच दिलाती है।

दास्तान की कोशिश संग दिशाओं को सौगात दिलाती है कदमों को अफसानों की धून सुनाती है तरानों की सोच दिलाती है।

दास्तान की कोशिश संग धाराओं को कहानी दिलाती है बदलावों को अंदाजों की उमंग सुनाती है अदाओं की सोच दिलाती है।

दास्तान की कोशिश संग अल्फाजों को रोशनी दिलाती है खयालों को सपनों की आहट सुनाती है धाराओं की सोच दिलाती है।


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कविता. ५८०५. दास्तान की कोशिश संग।

                           दास्तान की कोशिश संग। दास्तान की कोशिश संग अरमानों को आस दिलाती है राहों को एहसासों की तलाश सुनाती है आशाओं की सो...