Wednesday, 18 March 2026

कविता. ५८१५. उजालों की पहचान अक्सर।

                      उजालों की पहचान अक्सर।

उजालों की पहचान अक्सर जज्बातों संग सुबह दिलाती है लम्हों को एहसासों की आवाज तलाश के इरादे देकर जाती है।

उजालों की पहचान अक्सर खयालों संग पुकार दिलाती है किनारों को अंदाजों की समझ आस के इरादे देकर जाती है।

उजालों की पहचान अक्सर कदमों संग कोशिश दिलाती है इरादों को अफसानों की सोच अंदाज के इरादे देकर जाती है।

उजालों की पहचान अक्सर धाराओं संग दास्तान दिलाती है अदाओं को नजारों की सौगात अरमान के इरादे देकर जाती है।

उजालों की पहचान अक्सर आशाओं संग तलाश दिलाती है खयालों को सपनों की आहट रोशनी के इरादे देकर जाती है।

उजालों की पहचान अक्सर लहरों संग कोशिश दिलाती है बदलावों को धाराओं की उमंग सरगम के इरादे देकर जाती है।

उजालों की पहचान अक्सर दिशाओं संग अल्फाज दिलाती है आशाओं को तरानों की सुबह सौगात के इरादे देकर जाती है।

उजालों की पहचान अक्सर नजारों संग आहट दिलाती है कदमों को एहसासों की परख मुस्कान के इरादे देकर जाती है।

उजालों की पहचान अक्सर अरमानों संग पहचान दिलाती है उम्मीदों को खयालों की राह जज्बात के इरादे देकर जाती है।

उजालों की पहचान अक्सर आशाओं संग पहचान दिलाती है लहरों को सपनों की पुकार अहमियत के इरादे देकर जाती है।



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कविता. ५८१६. कदमों संग आशाओं की।

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