Sunday, 29 March 2026

कविता. ५८२६. किनारों की कहानी संग।

                            किनारों की कहानी संग।

किनारों की कहानी संग उम्मीद अक्सर मुस्कान दिलाती है जज्बातों को बदलावों की लहर‌ एहसास की पुकार देकर जाती है।

किनारों की कहानी संग पहचान अक्सर जज्बात दिलाती है अरमानों को इशारों की आहट अल्फाज की पुकार देकर जाती है।

किनारों की कहानी संग सोच अक्सर आवाज दिलाती है अंदाजों को सपनों की सौगात पहचान की पुकार देकर‌ जाती है।

किनारों की कहानी संग कोशिश अक्सर दास्तान दिलाती है दिशाओं को एहसासों की समझ सरगम की पुकार देकर जाती है।

किनारों की कहानी संग तलाश अक्सर नजारा दिलाती है राहों को अंदाजों की मुस्कान आस की पुकार देकर जाती है।

किनारों की कहानी संग दास्तान‌ अक्सर रोशनी दिलाती है आशाओं को नजारों की अहमियत उमंग की पुकार देकर जाती है।

किनारों की कहानी संग आवाज अक्सर पहचान दिलाती है लम्हों को धाराओं की सरगम अरमान की पुकार देकर जाती है।

किनारों की कहानी संग आस अक्सर अल्फाज दिलाती है धाराओं को खयालों की सोच सुबह की पुकार देकर जाती है।

किनारों की कहानी संग जज्बात अक्सर परख दिलाती है अफसानों को राहों की कोशिश अदा की पुकार देकर जाती है।

किनारों की कहानी संग लहर अक्सर रोशनी दिलाती है लहरों को आवाजों की पहचान उमंग की पुकार देकर जाती है।


No comments:

Post a Comment

कविता. ५९१७ दिशाओं की महफिल अक्सर।

                         दिशाओं की महफिल अक्सर। दिशाओं की महफिल अक्सर आशाओं को अफसानों से पुकार दिलाती है जज्बातों को बदलावों की मुस्कान खया...