Monday, 16 March 2026

कविता. ५८१३. उम्मीद को तलाश संग।

                             उम्मीद को तलाश संग।

उम्मीद को तलाश संग धाराओं से जुडकर मुस्कान सुनाती है एहसासों की कोशिश संग दास्तानों की सोच अफसाना दिलाती है।

उम्मीद को तलाश संग लहरों से जुडकर अंदाज सुनाती है अरमानों की सोच संग नजारों की उमंग अफसाना दिलाती है।

उम्मीद को तलाश संग किनारों से जुडकर बदलाव सुनाती है खयालों की सुबह संग आवाजों की पुकार अफसाना दिलाती है।

उम्मीद को तलाश संग इरादों से जुडकर पहचान सुनाती है कदमों की रोशनी संग लम्हों की कहानी अफसाना दिलाती है।

उम्मीद को तलाश संग एहसासों से जुडकर आवाज सुनाती है दिशाओं की महफिल संग आशाओं की सौगात अफसाना दिलाती है।

उम्मीद को तलाश संग दास्तानों से जुडकर परख सुनाती है अल्फाजों की दुनिया संग राहों की सुबह अफसाना दिलाती है।

उम्मीद को तलाश संग अंदाजों से जुडकर दास्तान सुनाती है नजारों की आस संग धाराओं की महफिल अफसाना दिलाती है।

उम्मीद को तलाश संग अल्फाजों से जुडकर समझ सुनाती है जज्बातों की उमंग संग लम्हों की सरगम अफसाना दिलाती है।

उम्मीद को तलाश संग एहसासों से जुडकर खयाल सुनाती है आशाओं की महफिल संग बदलावों की आस अफसाना दिलाती है।

उम्मीद को तलाश संग कदमों से जुडकर सपना सुनाती है तरानों की लहर संग जज्बातों की कोशिश अफसाना दिलाती है।



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कविता. ५८६४ सपनों की आहट संग।

                           सपनों की आहट संग। सपनों की आहट संग आशाओं से कोशिश दिलाती है खयालों से जुडकर इरादों की पहचान उमंग दिलाती है अल्फाज...