Wednesday, 4 March 2026

कविता. ५८०१. किनारों की मुस्कान संग।

                           किनारों की मुस्कान संग।

किनारों की मुस्कान संग आशाओं मे उम्मीद तलाश दिलाती है खयालों को सपनों की पहचान अक्सर आवाज सुनाती है।

किनारों की मुस्कान संग दास्तानों मे अंदाज इरादा दिलाती है लहरों को बदलावों की रोशनी अक्सर आवाज सुनाती है।

किनारों की मुस्कान संग अरमानों मे सपना एहसास दिलाती है आशाओं को तरानों की सोच अक्सर आवाज सुनाती है।

किनारों की मुस्कान संग लम्हों मे सौगात कोशिश दिलाती है उजालों को कदमों की पुकार अक्सर आवाज सुनाती है।

किनारों की मुस्कान संग जज्बातों मे आस रोशनी दिलाती है अल्फाजों को राहों की कहानी अक्सर आवाज सुनाती है।

किनारों की मुस्कान संग नजारों मे समझ‌ सुबह दिलाती है इशारों को एहसासों की उमंग अक्सर आवाज सुनाती है।

किनारों की मुस्कान संग धाराओं मे सोच पहचान दिलाती है तरानों को दिशाओं की अहमियत अक्सर आवाज सुनाती है।

किनारों की मुस्कान संग अफसानों मे लहर अफसाना दिलाती है उम्मीदों को अंदाजों की आहट अक्सर आवाज सुनाती है।

किनारों की मुस्कान संग तरानों मे कोशिश परख दिलाती है अरमानों को धाराओं की कहानी अक्सर आवाज सुनाती है।

किनारों की मुस्कान संग इरादों मे उमंग खयाल दिलाती है अदाओं को एहसासों की आस अक्सर आवाज सुनाती है।


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कविता. ५८६४ सपनों की आहट संग।

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