Saturday, 7 March 2026

कविता. ५८०४. सरगम कोई कहानी देकर।

                        सरगम कोई कहानी देकर।

सरगम कोई कहानी देकर इशारा सुनाती है अरमानों को लम्हों संग किनारों की पहचान दिलाती है बदलावों से आशाओं की महफिल दिलाती है। 

सरगम कोई कहानी देकर कोशिश सुनाती है अंदाजों को खयालों संग एहसासों की मुस्कान दिलाती है अदाओं से जज्बातों की महफिल दिलाती है।

सरगम कोई कहानी देकर अल्फाज सुनाती है तरानों को धाराओं संग दिशाओं की सुबह दिलाती है नजारों से सपनों की महफिल दिलाती है।

सरगम कोई कहानी देकर दास्तान सुनाती है दिशाओं को अफसानों संग तरानों की पुकार दिलाती है इरादों से उजालों की महफिल दिलाती है।

सरगम कोई कहानी देकर तलाश सुनाती है अदाओं को सपनों संग कदमों की सौगात दिलाती है एहसासों से कदमों की महफिल दिलाती है।

सरगम कोई कहानी देकर सोच सुनाती है दास्तानों को लहरों संग अंदाजों की‌ अहमियत दिलाती है उम्मीदों से आवाजों की महफिल दिलाती है।

सरगम कोई कहानी देकर आस सुनाती है धाराओं को नजारों संग लहरों की पुकार दिलाती है इरादों से दिशाओं की महफिल दिलाती है।

सरगम कोई कहानी देकर उमंग सुनाती है किनारों को अफसानों संग बदलावों की रोशनी दिलाती है राहों से आशाओं की महफिल दिलाती है।

सरगम कोई कहानी देकर नजारा सुनाती है आवाजों को धाराओं संग दिशाओं की पहचान दिलाती है किनारों से एहसासों की महफिल दिलाती है।

सरगम कोई कहानी देकर समझ सुनाती है आशाओं को अल्फाजों संग लहरों की कोशिश दिलाती है जज्बातों से तरानों की महफिल दिलाती है।


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कविता. ५८०५. दास्तान की कोशिश संग।

                           दास्तान की कोशिश संग। दास्तान की कोशिश संग अरमानों को आस दिलाती है राहों को एहसासों की तलाश सुनाती है आशाओं की सो...