Monday, 2 March 2026

कविता. ५७९९. कोई आहट अक्सर।

                             कोई आहट अक्सर।

कोई आहट अक्सर आशाओं की कहानी पहचान सुनाती है इरादों को एहसासों की पुकार उमंग सुनाकर आगे चलती है।

कोई आहट अक्सर तरानों की सरगम अहमियत सुनाती है राहों को अरमानों की सोच कोशिश सुनाकर आगे जाती है।

कोई आहट अक्सर लहरों की महफिल सौगात सुनाती है किनारों को अंदाजों की पहचान इशारा सुनाकर आगे जाती है।

कोई आहट अक्सर दास्तानों की समझ आस सुनाती है दास्तानों को नजारों की सुबह अफसाना सुनाकर आगे जाती है।

कोई आहट अक्सर कदमों की रोशनी अल्फाज सुनाती है तरानों को लम्हों की उम्मीद सपना सुनाकर आगे जाती है।

कोई आहट अक्सर अंदाजों की उम्मीद एहसास सुनाती है बदलावों को धाराओं की मुस्कान खयाल सुनाकर‌ आगे जाती है।

कोई आहट अक्सर उजालों की परख तलाश सुनाती है अफसानों को लहरों की कहानी आवाज सुनाकर आगे जाती है।

कोई आहट अक्सर आवाजों की मुस्कान अदा सुनाती है दास्तानों को किनारों की महफिल लहर सुनाकर आगे जाती है।

कोई आहट अक्सर दिशाओं की पहचान नजारा सुनाती है खयालों को सपनों की सोच अल्फाज सुनाकर आगे जाती है।

कोई आहट अक्सर धाराओं की सौगात इशारा सुनाती है आशाओं को कदमों की अहमियत दास्तान सुनाकर आगे जाती है।

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