Friday, 20 March 2026

कविता. ५८१७. खयालों की सरगम अक्सर।

                        खयालों की सरगम अक्सर।

खयालों की सरगम अक्सर आशाओं से आहट दिलाती है किनारों को कदमों की सौगात सपना दिलाती है उजालों संग पहचान दिलाती है।

खयालों की सरगम अक्सर लहरों से कहानी दिलाती है एहसासों को दास्तानों की समझ अरमान दिलाती है लम्हों संग पहचान दिलाती है।

खयालों की सरगम अक्सर दिशाओं से आस दिलाती है अफसानों को अल्फाजों की दुनिया पुकार दिलाती है नजारों संग पहचान दिलाती है।

खयालों की सरगम अक्सर जज्बातों से सुबह दिलाती है बदलावों को उम्मीदों की राह मुस्कान दिलाती है अदाओं संग पहचान दिलाती है।

खयालों की सरगम अक्सर धाराओं से उमंग दिलाती है अंदाजों को दास्तानों की समझ तलाश दिलाती है दास्तानों संग पहचान दिलाती है।

खयालों की सरगम अक्सर तरानों से सोच दिलाती है इरादों को नजारों की कोशिश पुकार दिलाती है आवाजों संग पहचान दिलाती है।

खयालों की सरगम अक्सर अदाओं से अरमान दिलाती है दिशाओं को धाराओं की धून रोशनी दिलाती है कदमों संग पहचान दिलाती है।

खयालों की सरगम अक्सर जज्बातों से सौगात दिलाती है राहों को अरमानों की सोच कोशिश दिलाती है अल्फाजों संग पहचान दिलाती है।

खयालों की सरगम अक्सर दास्तानों से पहचान दिलाती है उजालों को सपनों की अहमियत कहानी दिलाती है राहों संग पहचान दिलाती है।

खयालों की सरगम अक्सर सपनों से उम्मीद दिलाती है किनारों को एहसासों की तलाश सुबह दिलाती है कदमों संग पहचान दिलाती है।

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कविता. ५८१७. खयालों की सरगम अक्सर।

                        खयालों की सरगम अक्सर। खयालों की सरगम अक्सर आशाओं से आहट दिलाती है किनारों को कदमों की सौगात सपना दिलाती है उजालों सं...