Friday, 3 April 2026

कविता. ५८३१. उमंग को आशाओं की।

                            उमंग को आशाओं की।

उमंग को आशाओं की कहानी एहसास सुनाती है तरानों की सरगम अक्सर अफसाना दिलाती है अंदाजों की रोशनी दिलाती है।

उमंग को आशाओं की समझ मुस्कान सुनाती है खयालों की महफिल अक्सर तलाश दिलाती है दिशाओं की रोशनी दिलाती है।

उमंग को आशाओं की परख अरमान सुनाती है दास्तानों की आस अक्सर पहचान दिलाती है कदमों की रोशनी दिलाती है।

उमंग को आशाओं की आहट लहर सुनाती है जज्बातों की सौगात अक्सर इशारा दिलाती है बदलावों की रोशनी दिलाती है।

उमंग को आशाओं की सोच सरगम सुनाती है अंदाजों की अहमियत अक्सर आवाज दिलाती है लम्हों की रोशनी दिलाती है।

उमंग को आशाओं की कोशिश अल्फाज सुनाती है सपनों की पुकार अक्सर किनारा दिलाती है उजालों की रोशनी दिलाती है।

उमंग को आशाओं की राह पहचान सुनाती है धाराओं की सोच अक्सर सहारा दिलाती है उम्मीदों की रोशनी दिलाती है।

उमंग को आशाओं की सौगात तराना सुनाती है अफसानों की आहट अक्सर पुकार दिलाती है आवाजों की रोशनी दिलाती है।

उमंग को आशाओं की सुबह बदलाव सुनाती है अदाओं की धून अक्सर सरगम दिलाती है नजारों की रोशनी दिलाती है।

उमंग को आशाओं की उम्मीद आवाज सुनाती है किनारों की मुस्कान अक्सर दास्तान दिलाती है अल्फाजों की रोशनी दिलाती है।

No comments:

Post a Comment

कविता. ५८३२. कुछ एहसासों की।

                             कुछ एहसासों की। कुछ एहसासों की कहानी जज्बात सुनाती है खयालों को सपनों की आहट सरगम सुनाती है लम्हों को अल्फाजों ...