Sunday, 17 May 2026

कविता. ५८७५ सुबह की सरगम से।

 

                               सुबह की सरगम से।

सुबह की सरगम से दिशाएं उम्मीद सुनाती है कदमों को अल्फाजों की मुस्कान सपना देकर जाती है जज्बातों को उमंग दिलाती है।

सुबह की सरगम से राहे अरमान सुनाती है अंदाजों को नजारों की अहमियत तलाश देकर जाती है एहसासों को उमंग दिलाती है।

सुबह की सरगम से अदाएं पहचान सुनाती है दास्तानों को खयालों की पुकार कोशिश देकर जाती है लम्हों को उमंग दिलाती है।

सुबह की सरगम से दास्ताने मुस्कान सुनाती है लहरों को दिशाओं की कहानी अफसाना देकर जाती है तरानों को उमंग दिलाती है।

सुबह की सरगम से उम्मीदे कोशिश सुनाती है किनारों को अदाओं की आवाज अंदाज देकर जाती है धाराओं को उमंग दिलाती है।

सुबह की सरगम से लहरे पुकार सुनाती है बदलावों को इरादों की सौगात आहट देकर जाती है राहों को उमंग दिलाती है।

सुबह की सरगम से तराने आवाज सुनाती है धाराओं को दास्तानों की समझ रोशनी देकर जाती है अरमानों को उमंग दिलाती है।

सुबह की सरगम से आशाएं अल्फाज सुनाती है जज्बातों को इशारों की कोशिश लम्हा देकर जाती है उजालों को उमंग दिलाती है।

सुबह की सरगम से आवाजे जज्बात सुनाती है अफसानों को आशाओं की महफिल तलाश देकर जाती है अंदाजों को उमंग दिलाती है।

सुबह की सरगम से धाराएं एहसास सुनाती है तरानों को बदलावों की आस बदलाव देकर जाती है आशाओं को उमंग दिलाती है।

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कविता. ५८७५ सुबह की सरगम से।

                                 सुबह की सरगम से। सुबह की सरगम से दिशाएं उम्मीद सुनाती है कदमों को अल्फाजों की मुस्कान सपना देकर जाती है जज्...