Thursday, 5 February 2026

कविता. ५७७४. उजालों की समझ से।

                             उजालों की समझ से।

उजालों की समझ से आशाओं की महफिल तलाश देकर जाती है जज्बातों को इशारों की सौगात सरगम सुनाकर जाती है।

उजालों की समझ से खयालों की कहानी पहचान देकर जाती है तरानों को बदलावों की उमंग सरगम सुनाकर जाती है।

उजालों की समझ से दास्तानों की रोशनी आवाज देकर जाती है किनारों को एहसासों की सोच सरगम सुनाकर जाती है।

उजालों की समझ से दिशाओं की सुबह अफसाना देकर जाती है लम्हों को अल्फाजों की दुनिया सरगम सुनाकर जाती है।

उजालों की समझ से आवाजों की धून अरमान देकर जाती है उम्मीदों को धाराओं की अहमियत सरगम सुनाकर जाती है।

उजालों की समझ से लहरों की आहट सपना देकर जाती है नजारों को अरमानों की कोशिश सरगम सुनाकर जाती है।

उजालों की समझ से अदाओं की उम्मीद अंदाज देकर जाती है दिशाओं को तरानों की मुस्कान सरगम‌ सुनाकर जाती है।

उजालों की समझ‌ से राहों की आहट जज्बात देकर जाती है आशाओं को कदमों की सौगात सरगम सुनाकर जाती है।

उजालों की समझ से किनारों की आस एहसास देकर जाती है अल्फाजों को लहरों की कहानी सरगम सुनाकर जाती है।

उजालों की समझ से नजारों की परख पुकार देकर जाती है एहसासों को सपनों की आहट सरगम सुनाकर जाती है।


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