Monday, 9 February 2026

कविता. ५७७८. खयालों की सुबह संग।

                           खयालों की सुबह संग।

खयालों की सुबह संग आशाओं से एहसास तलाश दिलाती है कदमों को अरमानों की कहानी अक्सर कोशिश सुनाती है।

खयालों की सुबह संग जज्बातों से इरादा उमंग दिलाती है तरानों को बदलावों की आस अक्सर कोशिश सुनाती है।

खयालों की सुबह संग किनारों से समझ जज्बात दिलाती है इशारों को उजालों की दुनिया अक्सर कोशिश सुनाती है।

खयालों की सुबह संग धाराओं से पुकार अंदाज दिलाती है लम्हों को दिशाओं की रोशनी अक्सर कोशिश सुनाती है।

खयालों की सुबह संग अफसानों से उम्मीद मुस्कान दिलाती है किनारों को सपनों की पहचान अक्सर कोशिश सुनाती है।

खयालों की सुबह संग लहरों से आस अफसाना दिलाती है नजारों को दिशाओं की महफिल अक्सर कोशिश सुनाती है।

खयालों की सुबह संग दास्तानों से लहर बदलाव दिलाती है धाराओं को उम्मीदों की सौगात अक्सर कोशिश सुनाती है।

खयालों की सुबह संग तरानों से आहट अरमान दिलाती है अल्फाजों को राहों की परख अक्सर कोशिश सुनाती है।

खयालों की सुबह संग इशारों‌ से आवाज उम्मीद दिलाती है लहरों को एहसासों की सोच अक्सर कोशिश सुनाती है।

खयालों की सुबह संग अंदाजों से अदा जज्बात दिलाती है किनारों को अफसानों की समझ अक्सर कोशिश सुनाती है।

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कविता. ५८३५. सपनों की आशाओं संग।

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