Sunday, 5 April 2026

कविता. ५८३३. आवाज को सपनों संग।

                        आवाज को सपनों संग।       

आवाज को सपनों संग पहचान तराना दिलाती है आशाओं की महफिल के किनारे संग दिशाओं को जज्बात देकर जाती है।

आवाज को सपनों संग कोशिश एहसास दिलाती है इरादों की सुबह के तराने संग अफसानों को जज्बात देकर जाती है।

आवाज को सपनों संग आहट बदलाव दिलाती है खयालों की सौगात के इशारे संग उजालों को जज्बात देकर जाती है।

आवाज को सपनों संग पुकार मुस्कान दिलाती है उम्मीदों की समझ के नजारे संग आशाओं को जज्बात देकर जाती है।

आवाज को सपनों संग उमंग अहमियत दिलाती है धाराओं की सोच के लम्हे संग नजारों को जज्बात देकर जाती है।

आवाज को सपनों संग तलाश अंदाज दिलाती है कदमों की आस के इरादे संग खयालों को जज्बात देकर जाती है।

आवाज को सपनों संग रोशनी अरमान दिलाती है तरानों की सरगम के सहारे संग उम्मीदों को जज्बात देकर जाती है।

आवाज को सपनों संग दास्तान कोशिश दिलाती है बदलावों की पुकार के उजाले संग आशाओं को जज्बात देकर जाती है।

आवाज को सपनों संग आस अहमियत दिलाती है धाराओं की रोशनी के इरादे संग अरमानों को जज्बात देकर जाती है।

आवाज को सपनों संग सोच उम्मीद दिलाती है दिशाओं की सुबह के अंदाजे संग धाराओं को जज्बात देकर जाती है।

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कविता. ५८३५. सपनों की आशाओं संग।

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