Monday, 6 April 2026

कविता. ५८३४. किनारों की मुस्कान अक्सर।

                        किनारों की मुस्कान अक्सर।

किनारों की मुस्कान अक्सर एहसासों की आंधी लाती है जज्बातों को सपनों की पहचान इशारा दिलाती है रोशनी लाती है।

किनारों की मुस्कान अक्सर खयालों की सुबह लाती है बदलावों को धाराओं की आहट उजाला दिलाती है रोशनी लाती है।

किनारों की मुस्कान अक्सर अरमानों की उमंग लाती है लहरों को तरानों की सरगम बदलाव दिलाती है रोशनी लाती है।

किनारों की मुस्कान अक्सर धाराओं की कोशिश लाती है अफसानों को इशारों की लहर कहानी दिलाती है रोशनी लाती है।

किनारों की मुस्कान अक्सर नजारों की पहचान लाती है कदमों को अल्फाजों की दुनिया सौगात दिलाती है रोशनी लाती है।

किनारों की मुस्कान अक्सर आशाओं की तलाश लाती है दास्तानों को नजारों की अहमियत पुकार दिलाती है रोशनी लाती है।

किनारों की मुस्कान अक्सर दिशाओं की बदलाव लाती है अदाओं को उजालों की सोच सरगम दिलाती है रोशनी लाती है।

किनारों की मुस्कान अक्सर तरानों की अल्फाज लाती है खयालों को अरमानों की आवाज दास्तान दिलाती है रोशनी लाती है।

किनारों की मुस्कान अक्सर कदमों की समझ लाती है अंदाजों को अफसानों की तलाश किनारा दिलाती है रोशनी लाती है।

किनारों की मुस्कान अक्सर राहों की आहट लाती है आशाओं को उम्मीदों की कोशिश उमंग दिलाती है रोशनी लाती है।



No comments:

Post a Comment

कविता. ५८३५. सपनों की आशाओं संग।

                          सपनों की आशाओं संग। सपनों की आशाओं संग कदमों को अल्फाजों की पहचान इशारा दिलाती है उजालों को उम्मीदों की समझ किनारा...