Thursday, 1 January 2026

कविता. ५७३९. मुस्कान की सुबह संग।

                          मुस्कान की सुबह संग।

मुस्कान की सुबह संग आशाओं की महफिल खयाल सुनाती है नजारों को दिशाओं की आहट संग अरमानों की आवाज दिलाती है।

मुस्कान की सुबह संग इरादों की पहचान उमंग सुनाती है दास्तानों को लहरों की कोशिश संग‌ बदलावों की आवाज दिलाती है।

मुस्कान की सुबह संग नजारों की आस इरादा सुनाती है एहसासों को कदमों की उम्मीद संग खयालों की आवाज दिलाती है।

मुस्कान की सुबह संग उजालों की सरगम अरमान सुनाती है तरानों को लम्हों की कहानी संग दिशाओं की आवाज दिलाती है।

मुस्कान की सुबह संग जज्बातों की पुकार सपना सुनाती है अल्फाजों को राहों की समझ संग कदमों की आवाज दिलाती है।

मुस्कान की सुबह संग धाराओं की लहर सोच सुनाती है उजालों को उजालों की पहचान संग धाराओं की आवाज दिलाती है।

मुस्कान की सुबह संग तरानों की आहट इशारा सुनाती है अफसानों को किनारों की सौगात संग अदाओं की आवाज दिलाती है।

मुस्कान की सुबह संग अंदाजों की उम्मीद तलाश सुनाती है इशारों को नजारों की पुकार संग‌‌ राहों की आवाज दिलाती है।

मुस्कान की सुबह संग अरमानों की रोशनी समझ सुनाती है एहसासों को आशाओं की सरगम संग आशाओं की आवाज दिलाती है।

मुस्कान की सुबह संग दास्तानों की पहचान उजाला सुनाती है अंदाजों को बदलावों की परख संग किनारों की आवाज दिलाती है।

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कविता. ५७४४. जज्बात को मुस्कान की।

                        जज्बात को मुस्कान की। जज्बात को मुस्कान की आहट इशारा देती है किनारों को कदमों की सौगात अफसाना देती है लम्हों को आशाओ...