Sunday, 4 January 2026

कविता. ५७४२. जज्बातों की रोशनी से जुडकर।

                      जज्बातों की रोशनी से जुडकर। 

जज्बातों की रोशनी से जुडकर आवाज नया एहसास दिलाती है कदमों को अरमानों की सोच संग खयालों की समझ दिलाती है।

जज्बातों की रोशनी से जुडकर उम्मीद नया इरादा  दिलाती है तरानों को बदलावों की पुकार संग अंदाजों की समझ दिलाती है।

जज्बातों की रोशनी से जुडकर कोशिश नया अल्फाज दिलाती है उजालों को सपनों की पहचान संग आशाओं की समझ दिलाती है।

जज्बातों की रोशनी से जुडकर अंदाज नया नजारा दिलाती है उम्मीदों को आशाओं की सुबह संग दास्तानों की समझ दिलाती है।

जज्बातों की रोशनी से जुडकर उमंग नया सपना दिलाती है दिशाओं को लहरों की कहानी संग उम्मीदों की समझ दिलाती है।

जज्बातों की रोशनी से जुडकर सरगम नया बदलाव दिलाती है किनारों को अफसानों की सौगात संग राहों की समझ दिलाती है।

जज्बातों की रोशनी से जुडकर सौगात नया लहर दिलाती है धाराओं को दास्तानों की रोशनी संग लम्हों की समझ दिलाती है।

जज्बातों की रोशनी से जुडकर आहट नया उजाला दिलाती है अदाओं को खयालों की पुकार संग कदमों की समझ दिलाती है।

जज्बातों की रोशनी से जुडकर तलाश नया अफसाना दिलाती है अफसानों को अंदाजों की आहट संग तरानों की समझ दिलाती है।

जज्बातों की रोशनी से जुडकर उमंग नया कहानी दिलाती है आशाओं को उम्मीदों की आस संग बदलावों की समझ दिलाती है।


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कविता. ५७४३. आवाज की पुकार से।

                          आवाज की पुकार से। आवाज की पुकार से आशाओं से एहसास पहचान सुनाती है तरानों को बदलावों की कोशिश उमंग दिलाती है। आवाज ...