Sunday, 25 January 2026

कविता. ५७६३. अंदाजों की पहचान संग।

                          अंदाजों की पहचान संग।

अंदाजों की पहचान संग अल्फाजों से कदमों की सौगात तलाश दिलाती है उजालों को सपनों की आहट देकर अरमान जगाती है।

अंदाजों की पहचान संग धाराओं से नजारों की कोशिश उमंग दिलाती है खयालों को जज्बातों की रोशनी देकर अरमान जगाती है।

अंदाजों की पहचान संग बदलावों से इशारों की आस पुकार दिलाती है एहसासों को आवाजों की धून देकर अरमान जगाती है।

अंदाजों की पहचान संग किनारों से अदाओं की सुबह उम्मीद दिलाती है तरानों को अफसानों की सोच देकर  अरमान जगाती है।

अंदाजों की पहचान संग दिशाओं से आशाओं की राह मुस्कान दिलाती है अल्फाजों को दिशाओं की महफिल देकर अरमान जगाती है।

अंदाजों की पहचान संग तरानों से लम्हों की कहानी बदलाव दिलाती है दास्तानों को लहरों की पहचान देकर अरमान जगाती है।

अंदाजों की पहचान संग राहों से अफसानों की सुबह कोशिश दिलाती है खयालों को नजारों की आस देकर अरमान जगाती है।

अंदाजों की पहचान संग उजालों से धाराओं की पुकार अफसाना दिलाती है आशाओं को उम्मीदों की सौगात देकर अरमान जगाती है।

अंदाजों की पहचान संग लहरों से आवाजों की सरगम मुस्कान दिलाती है लम्हों को धाराओं की अहमियत देकर अरमान जगाती है।

अंदाजों की पहचान संग दास्तानों से राहों की परख दिलाती है कदमों को एहसासों की कहानी देकर अरमान जगाती है।





No comments:

Post a Comment

कविता. ५७६७. एक तराना।

                                  एक तराना। एक तराना आशाओं की पहचान संग मुस्कान दिलाता है उजालों संग दास्तानों की समझ अक्सर आहट देकर जाती है...