Friday, 30 January 2026

कविता. ५७६८. आवाज की सरगम संग।

                         आवाज की सरगम संग।

आवाज की सरगम संग आशाओं की महफिल पुकार सुनाती है दिशाओं को दास्तानों की तलाश इशारा सुनाकर आगे बढती जाती है।

आवाज की सरगम संग खयालों की पहचान तराना‌ सुनाती है किनारों को कदमों की सौगात इशारा सुनाकर आगे बढती जाती है।

आवाज की सरगम संग अंदाजों की समझ उमंग सुनाती है अल्फाजों को राहों की रोशनी इशारा सुनाकर आगे बढती जाती है।

आवाज की सरगम संग नजारों की सोच कोशिश सुनाती है इरादों को एहसासों की पहचान इशारा सुनाकर आगे बढती जाती है।

आवाज की सरगम संग बदलावों की आस‌ कहानी सुनाती है लहरों को अफसानों की उम्मीद इशारा सुनाकर आगे बढती जाती है।

आवाज की सरगम संग किनारों की लहर एहसास सुनाती है आशाओं को अंदाजों की सुबह इशारा सुनाकर आगे बढती जाती है।

आवाज की सरगम संग धाराओं की परख अफसाना सुनाती है राहों को उजालों की मुस्कान इशारा सुनाकर आगे बढती जाती है।

आवाज की सरगम संग उम्मीदों की सौगात जज्बात सुनाती है खयालों को सपनों की अहमियत इशारा सुनाकर आगे बढती जाती है।

आवाज की सरगम संग लम्हों की रोशनी मुस्कान सुनाती है अफसानों को एहसासों की आस इशारा सुनाकर आगे बढती जाती है।

आवाज की सरगम संग कदमों की आहट तलाश सुनाती है जज्बातों को अरमानों की परख इशारा सुनाकर आगे बढती जाती है।

आवाज की सरगम संग दिशाओं की उम्मीद समझ सुनाती है नजारों को खयालों की कोशिश इशारा सुनाकर आगे बढती जाती है।

No comments:

Post a Comment

कविता. ५७६९. आशाओं की कहानी संग।

                           आशाओं की कहानी संग। आशाओं की कहानी संग नजारों से पहचान सुनाती है दास्तानों को लहरों की कोशिश पुकार दिलाती है आवाज...