Wednesday, 7 January 2026

कविता. ५७४५. किसी मुस्कान संग।

                           किसी मुस्कान संग।

किसी मुस्कान संग आशाओं से एहसास की पुकार उजाला देती है कदमों को अल्फाजों की आस अरमान दिलाती है।

किसी मुस्कान संग जज्बातों से कोशिश की कश्ती रोशनी देती है तरानों को बदलावों की लहर अरमान दिलाती है।

किसी मुस्कान संग दास्तानों से आवाज की धारा पहचान देती है आशाओं को इरादों की सुबह अरमान दिलाती है।

किसी मुस्कान संग उजालों से उमंग की आहट अफसाना देती है लम्हों को खयालों की समझ अरमान दिलाती है।

किसी मुस्कान संग कदमों से दास्तान की कहानी इशारा देती है किनारों को आवाजों की धून अरमान दिलाती है।

किसी मुस्कान संग अफसानों से उम्मीद की तलाश आस देती है उजालों को सपनों की अहमियत अरमान दिलाती है।

किसी मुस्कान संग तरानों से सुबह की सरगम सोच देती है अफसानों को धाराओं की महफिल अरमान दिलाती है।

किसी मुस्कान संग नजारों से सौगात की पहचान आवाज देती है इशारों को अदाओं की दास्तान अरमान दिलाती है।

किसी मुस्कान संग अंदाजों से तलाश की राह उजाला देती है एहसासों को आशाओं की कहानी अरमान दिलाती है।

किसी मुस्कान संग उम्मीदों से आस की रोशनी दास्तान देती है इरादों को कदमों की राह अरमान दिलाती है।

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कविता. ५७४६. एक एहसास को आशाओं की।

                     एक एहसास को आशाओं की। एक एहसास को आशाओं की महफिल उमंग दिलाती है लम्हों को अल्फाजों की दुनिया दास्तान सुनाती है अदाओं को...