Tuesday, 6 January 2026

कविता. ५७४४. जज्बात को मुस्कान की।

                        जज्बात को मुस्कान की।

जज्बात को मुस्कान की आहट इशारा देती है किनारों को कदमों की सौगात अफसाना देती है लम्हों को आशाओं की तलाश देती है।

जज्बात को मुस्कान की परख जज्बात देती है दिशाओं को एहसासों की कोशिश दास्तान देती है तरानों को बदलावों की तलाश देती है।

जज्बात को मुस्कान की रोशनी नजारा देती है आवाजों को धाराओं की सरगम पुकार देती है अदाओं को खयालों की तलाश देती है।

जज्बात को मुस्कान की सरगम पहचान देती है एहसासों को दास्तानों की आस लहर देती है एहसासों को कदमों की तलाश देती है।

जज्बात को मुस्कान की समझ आवाज देती है दिशाओं को किनारों की अहमियत इरादा देती है राहों को अरमानों की तलाश देती है।

जज्बात को मुस्कान की कहानी उजाला देती है अल्फाजों को लम्हों की अंदाज आस देती है खयालों को राहों की तलाश देती है।

जज्बात को मुस्कान की कोशिश उमंग देती है आशाओं को नजारों की समझ आहट देती है दिशाओं को अंदाजों की तलाश देती है।

जज्बात को मुस्कान की सरगम सपना देती है अफसानों को किनारों की आस एहसास देती है उजालों को अल्फाजों की तलाश देती है।

जज्बात को मुस्कान की सुबह उम्मीद देती है अरमानों को दास्तानों की महफिल नजारा देती है धाराओं को लहरों की तलाश देती है।

जज्बात को मुस्कान की उमंग आस देती है नजारों को अदाओं की पहचान उम्मीद देती है आवाजों को धाराओं की तलाश देती है।


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कविता. ५७४५. किसी मुस्कान संग।

                           किसी मुस्कान संग। किसी मुस्कान संग आशाओं से एहसास की पुकार उजाला देती है कदमों को अल्फाजों की आस अरमान दिलाती है।...