Thursday, 22 January 2026

कविता. ५७६०. किनारा अक्सर कोई।

                                किनारा अक्सर कोई।

किनारा अक्सर कोई कहानी सुनाता है दिशाओं को कदमों का अरमान दिलाता है जज्बातों की रोशनी संग एहसास देकर जाता है।

किनारा अक्सर कोई आवाज सुनाता है तरानों को बदलावों का सपना दिलाता है इशारों की आहट संग एहसास देकर जाता है।

किनारा अक्सर कोई तलाश सुनाता है अल्फाजों को राहों का तराना दिलाता है अंदाजों की पहचान संग एहसास देकर जाता है।

किनारा अक्सर कोई सरगम सुनाता है लहरों को खयालों का अफसाना दिलाता है आशाओं की कोशिश संग एहसास देकर जाता है।

किनारा अक्सर कोई उमंग सुनाता है कदमों को जज्बातों का उम्मीद दिलाता है खयालों की आहट संग एहसास देकर जाता है।

किनारा अक्सर कोई पुकार सुनाता है दास्तानों को लहरों का आवाज दिलाता है उजालों की सुबह संग एहसास देकर जाता है।

किनारा अक्सर कोई आस सुनाता है अरमानों को लम्हों का अल्फाज दिलाता है कदमों की आस संग एहसास देकर जाता है।

किनारा अक्सर कोई कोशिश सुनाता है आशाओं को अफसानों का इरादा दिलाता है आवाजों की राह संग एहसास देकर जाता है।

किनारा अक्सर कोई तराना सुनाता है धाराओं को लम्हों का नजारा दिलाता है लहरों की पुकार संग एहसास देकर जाता है।

किनारा अक्सर कोई पहचान सुनाता है आवाजों को उजालों का बदलाव दिलाता है सपनों की आहट संग एहसास देकर जाता है।

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