Saturday, 10 January 2026

कविता. ५७४८. कदमों की आस से।

                             कदमों की आस से।

कदमों की आस से खयाल की कश्ती नजारा देती है अंदाजों को सपनों की आहट बदलाव दिलाती है तरानों की समझ दिलाती है।

कदमों की आस से मुस्कान की सुबह आवाज देती है दिशाओं को अरमानों की उमंग परख दिलाती है आशाओं की समझ दिलाती है।

कदमों की आस से दास्तान की पुकार उम्मीद देती है लहरों को खयालों की पहचान मुस्कान दिलाती है लम्हों की समझ दिलाती है।

कदमों की आस तलाश की कहानी अफसाना देती है दिशाओं को जज्बातों की सोच उम्मीद दिलाती है राहों की समझ दिलाती है।

कदमों की आस से आहट की लहर इशारा देती है उजालों को धाराओं की सौगात परख दिलाती है अरमानों की समझ दिलाती है।

कदमों की आस से सौगात की कोशिश तलाश देती है दास्तानों को तरानों की रोशनी अहमियत दिलाती है लम्हों की समझ दिलाती है।

कदमों की आस से नजारों की राह अल्फाज देती है किनारों को अदाओं की सरगम अफसाना दिलाती है आवाजों की समझ दिलाती है।

कदमों की आस से अंदाज की उमंग अरमान देती है जज्बातों को उम्मीदों की पुकार अहमियत दिलाती है अफसानों की समझ दिलाती है।

कदमों की आस से तरानों की सरगम आवाज देती है एहसासों को अदाओं की धून तराना दिलाती है बदलावों की समझ दिलाती है।

कदमों की आस से रोशनी की सौगात दास्तान देती है आवाजों को धाराओं की अहमियत जज्बात दिलाती है इशारों की समझ दिलाती है।

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कविता. ५७४८. कदमों की आस से।

                             कदमों की आस से। कदमों की आस से खयाल की कश्ती नजारा देती है अंदाजों को सपनों की आहट बदलाव दिलाती है तरानों की सम...