Friday, 23 January 2026

कविता. ५७६१. दास्तान को उजालों की।

                           दास्तान को उजालों की।

दास्तान को उजालों की पहचान इशारा देकर जाती है धाराओं की समझ अक्सर मुस्कान सुनाती है खयालों को जज्बात सुनाकर जाती है।

दास्तान को उजालों की दुनिया रोशनी देकर जाती है अरमानों की सोच अक्सर आवाज सुनाती है दिशाओं को जज्बात सुनाकर जाती है।

दास्तान को उजालों की कोशिश पुकार देकर जाती है इशारों की तलाश अक्सर अफसाना सुनाती है अदाओं को जज्बात सुनाकर जाती है।

दास्तान को उजालों की उमंग सुबह देकर जाती है आशाओं की महफिल अक्सर तराना सुनाती है राहों को जज्बात सुनाकर जाती है।

दास्तान को उजालों की आस सौगात देकर जाती है अंदाजों की पुकार अक्सर अरमान सुनाती है लहरों को जज्बात सुनाकर जाती है।

दास्तान को उजालों की परख अल्फाज देकर जाती है किनारों की मुस्कान अक्सर तलाश सुनाती है आशाओं को जज्बात सुनाकर जाती है।

दास्तान को उजालों की समझ लहर‌ देकर जाती है उम्मीदों की सौगात अक्सर अहमियत सुनाती है नजारों को जज्बात सुनाकर जाती है।

दास्तान को उजालों की आहट अंदाज देकर जाती है लम्हों की आवाज अक्सर कहानी सुनाती है सपनों को जज्बात सुनाकर जाती है।

दास्तान को उजालों की उम्मीद दास्तान देकर जाती है बदलावों की पुकार अक्सर आस सुनाती है तरानों को जज्बात सुनाकर जाती है।

दास्तान को उजालों की सोच किनारा देकर जाती है अफसानों की सरगम अक्सर कोशिश सुनाती है एहसासों को जज्बात सुनाकर जाती है।

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कविता. ५७६१. दास्तान को उजालों की।

                           दास्तान को उजालों की। दास्तान को उजालों की पहचान इशारा देकर जाती है धाराओं की समझ अक्सर मुस्कान सुनाती है खयालों ...