Wednesday, 21 January 2026

कविता. ५७५९. दिशाओं को दास्तानों संग।

                         दिशाओं को दास्तानों संग।

दिशाओं को दास्तानों संग एहसास‌ दिलाती है कदमों को अल्फाजों की सोच अक्सर आवाज दिलाती है किनारों की पुकार आहट सुनाती है।

दिशाओं को दास्तानों संग जज्बात दिलाती है राहों को अरमानों की कोशिश अक्सर उजाला दिलाती है उम्मीदों की सौगात आहट सुनाती है।

दिशाओं को दास्तानों संग सपना दिलाती है लम्हों को एहसासों की मुस्कान अक्सर पहचान दिलाती है लहरों की कहानी आहट सुनाती है।

दिशाओं को दास्तानों संग अंदाज दिलाती है खयालों को अफसानों की उमंग अक्सर तराना दिलाती है बदलावों की आस आहट सुनाती है।

दिशाओं को दास्तानों संग सरगम दिलाती है अदाओं को आशाओं की महफिल अक्सर सुबह दिलाती है उजालों की परख आहट सुनाती है।

दिशाओं को दास्तानों संग पुकार दिलाती है नजारों को लम्हों की अहमियत अक्सर कहानी दिलाती है इशारों की पहचान आहट सुनाती है।

दिशाओं को दास्तानों संग अरमान दिलाती है इरादों को अंदाजों की उम्मीद अक्सर रोशनी दिलाती है खयालों की तलाश आहट सुनाती है।

दिशाओं को दास्तानों संग लहर दिलाती है जज्बातों को बदलावों की समझ अक्सर अल्फाज दिलाती है अदाओं की आवाज आहट सुनाती है।

दिशाओं को दास्तानों संग आस दिलाती है अरमानों को उजालों की तलाश अक्सर खयाल‌ दिलाती है सपनों की पुकार आहट सुनाती है।

दिशाओं को दास्तानों संग सुबह दिलाती है तरानों को अंदाजों की पहचान अक्सर तलाश दिलाती है एहसासों की कोशिश आहट सुनाती है।



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कविता. ५७५९. दिशाओं को दास्तानों संग।

                         दिशाओं को दास्तानों संग। दिशाओं को दास्तानों संग एहसास‌ दिलाती है कदमों को अल्फाजों की सोच अक्सर आवाज दिलाती है किन...