Saturday, 17 January 2026

कविता. ५७५५. राहों की अहमियत से जुडकर।

                        राहों की अहमियत से जुडकर।

राहों की अहमियत से जुडकर उम्मीद दिशाएं देती है कदमों को अल्फाजों की रोशनी इशारे देती है खयालों को सपनों की आशाएं देती है।

राहों की अहमियत से जुडकर आवाज किनारे‌ देती है अफसानों को बदलावों की लहर तराने देती है अदाओं को एहसासों की आशाएं देती है।

राहों की अहमियत से जुडकर अल्फाज लहरे देती है खयालों को नजारों की आस उजाले देती है दास्तानों को लम्हों की आशाएं देती है।

राहों की अहमियत से जुडकर मुस्कान अफसाने देती है अरमानों को अंदाजों की पुकार उम्मीदे देती है दिशाओं को बदलावों की आशाएं देती है।

राहों की अहमियत से जुडकर धून लम्हे देती है तरानों को जज्बातों की रोशनी नजारे देती है अंदाजों को लहरों की आशाएं देती है।

राहों की अहमियत से जुडकर आस कोशिशें देती है धाराओं को दिशाओं की समझ अफसाने देती है लम्हों को अल्फाजों की आशाएं देती है।

राहों की अहमियत से जुडकर अंदाज दास्ताने देती है आशाओं को अंदाजों की पुकार सौगात देती है किनारों को लहरों की आशाएं देती है।

राहों की अहमियत से जुडकर समझ अदाएं देती है अरमानों को लम्हों की कहानी बदलाव देती है नजारों को जज्बातों की आशाएं देती है।

राहों की अहमियत से जुडकर सुबह सपने देती‌ है इशारों को उजालों की पहचान सहारा देती है कदमों को आवाजों की आशाएं देती है।

राहों की अहमियत से जुडकर उमंग धाराएं देती है किनारों को अंदाजों की समझ इरादा‌ देती है इशारों को बदलावों की आशाएं देती है।


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