Tuesday, 13 January 2026

कविता. ५७५१. कोशिश से जुडकर रोशनी।

                        कोशिश से जुडकर रोशनी।

कोशिश से जुडकर रोशनी अक्सर एहसास दिलाती है तरानों की पहचान संग आशाओं की महफिल दास्तान सुनाती है।

कोशिश से जुडकर रोशनी अक्सर अफसाना दिलाती है उजालों की सुबह संग नजारों की सौगात दास्तान सुनाती है।

कोशिश से जुडकर रोशनी अक्सर अरमान दिलाती है जज्बातों की सोच संग सपनों की अहमियत दास्तान सुनाती है।

कोशिश से जुडकर रोशनी अक्सर इशारा दिलाती है किनारों की मुस्कान संग लहरों की उमंग दास्तान सुनाती है।

कोशिश से जुडकर रोशनी अक्सर कहानी दिलाती है अल्फाजों की सरगम संग इरादों की आवाज दास्तान सुनाती है।

कोशिश से जुडकर रोशनी अक्सर परख दिलाती है बदलावों की आस संग दिशाओं की पहचान दास्तान सुनाती है।

कोशिश से जुडकर रोशनी अक्सर अंदाज दिलाती है लम्हों की आवाज संग जज्बातों की तलाश दास्तान सुनाती है।

कोशिश से जुडकर रोशनी अक्सर नजारा दिलाती है अफसानों की सौगात संग कदमों की आस दास्तान सुनाती है।

कोशिश से जुडकर रोशनी अक्सर मुस्कान दिलाती है सपनों की उड़ान संग अरमानों की आहट दास्तान सुनाती है।

कोशिश से जुडकर रोशनी अक्सर समझ‌ दिलाती है नजारों की अहमियत संग राहों की पुकार दास्तान सुनाती है।

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कविता. ५७५१. कोशिश से जुडकर रोशनी।

                        कोशिश से जुडकर रोशनी। कोशिश से जुडकर रोशनी अक्सर एहसास दिलाती है तरानों की पहचान संग आशाओं की महफिल दास्तान सुनाती ह...