Thursday, 9 April 2026

कविता. ५८३७. किनारों से जज्बातों की।

                          किनारों से जज्बातों की।

किनारों से जज्बातों की रोशनी तलाश दिलाती है अदाओं की सरगम अक्सर आशाओं को एहसास दिलाती है।

किनारों से जज्बातों की कोशिश अंदाज दिलाती है तरानों की पुकार अक्सर बदलावों को एहसास दिलाती है।

किनारों से जज्बातों की सुबह दास्तान दिलाती है कदमों की आस अक्सर अफसानों को एहसास दिलाती है।

किनारों से जज्बातों की मुस्कान परख दिलाती है उम्मीदों की अहमियत अक्सर अरमानों को एहसास दिलाती है।

किनारों से जज्बातों की उमंग नजारा दिलाती है आवाजों की पहचान अक्सर तरानों को एहसास दिलाती है।

किनारों से जज्बातों की पुकार कोशिश दिलाती है लहरों की रोशनी अक्सर दास्तानों को एहसास दिलाती है।

किनारों से जज्बातों की समझ पहचान दिलाती है उजालों की सौगात अक्सर आवाजों को‌ एहसास दिलाती है।

किनारों से जज्बातों की लहर अफसाना दिलाती है इशारों की तलाश अक्सर धाराओं को एहसास दिलाती है।

किनारों से जज्बातों की आहट सपना दिलाती है दास्तानों की कोशिश अक्सर नजारों को एहसास दिलाती है।

किनारों से जज्बातों की सौगात खयाल‌ दिलाती है धाराओं की सुबह अक्सर अल्फाजों को एहसास दिलाती है।


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कविता. ५८३७. किनारों से जज्बातों की।

                          किनारों से जज्बातों की। किनारों से जज्बातों की रोशनी तलाश दिलाती है अदाओं की सरगम अक्सर आशाओं को एहसास दिलाती है। ...