Monday, 22 July 2024

कविता. ५२४१. रोशनी संग आशाओं की।

                               रोशनी संग आशाओं की।

रोशनी संग आशाओं की लहर पहचान दिलाती है लम्हों को सपनों की सुबह देकर जाती है जज्बातों को इशारों की कहानी पुकार सुनाती है।

रोशनी संग आशाओं की मुस्कान कोशिश दिलाती है राहों को अरमानों की उमंग देकर जाती है आवाजों को अदाओं की सोच पुकार सुनाती है।

रोशनी संग आशाओं की आहट सरगम दिलाती है कदमों को उजालों की आस देकर जाती है किनारों को अल्फाजों की तलाश पुकार सुनाती है।

रोशनी संग आशाओं की समझ सौगात दिलाती है उम्मीदों को एहसासों की समझ देकर जाती है अंदाजों को दास्तानों की पहचान पुकार सुनाती है।

रोशनी संग आशाओं की उम्मीद सोच दिलाती है अंदाजों को बदलावों की मुस्कान देकर जाती है उम्मीदों को राहों की कहानी पुकार सुनाती है।

रोशनी संग आशाओं की सुबह अफसाना दिलाती है दिशाओं को कदमों की सोच देकर जाती है दास्तानों को एहसासों की कोशिश पुकार सुनाती है।

रोशनी संग आशाओं की कोशिश खयाल दिलाती है इशारों को अंदाजों की अहमियत देकर जाती है उजालों को बदलावों की मुस्कान पुकार सुनाती है।

रोशनी संग आशाओं की सोच नजारा दिलाती है लहरों को राहों की सौगात देकर जाती है अफसानों को आवाजों की परख पुकार सुनाती है।

रोशनी संग आशाओं की उमंग सहारा दिलाती है उजालों को खयालों की समझ देकर जाती है दिशाओं को अंदाजों की आस पुकार सुनाती है।

रोशनी संग आशाओं की लहर जज्बात दिलाती है इरादों को अरमानों की मुस्कान देकर जाती है नजारों को सपनों की कोशिश पुकार सुनाती है।

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