Tuesday, 12 August 2025

कविता. ५५९७. जज्बात संग दिशाओं की सुबह।

                        जज्बात संग दिशाओं की सुबह।

जज्बात संग दिशाओं की सुबह से आशाओं की महफिल उमंग दिलाती है कदमों की सौगात अक्सर उजालों की रोशनी तलाश देकर जाती है।

जज्बात संग दिशाओं की सुबह से लम्हों की पुकार आवाज दिलाती है किनारों की मुस्कान अक्सर अफसानों की सोच तलाश देकर जाती है।

जज्बात संग दिशाओं की सुबह से अंदाजों की पहचान नजारा दिलाती है इशारों की आहट अक्सर दास्तानों की सरगम तलाश देकर जाती है।

जज्बात संग दिशाओं की सुबह से अरमानों की परख कोशिश दिलाती है आशाओं की आस अक्सर तरानों की समझ तलाश देकर जाती है।

जज्बात संग दिशाओं की सुबह से आवाजों की धून अफसाना दिलाती है बदलावों की पुकार अक्सर खयालों की राह तलाश देकर जाती है।

जज्बात संग दिशाओं की सुबह से लहरों की कहानी एहसास दिलाती है जज्बातों की आहट अक्सर सपनों की सौगात तलाश देकर जाती है।

जज्बात संग दिशाओं की सुबह से तरानों की आहट अरमान दिलाती है अंदाजों की राह अक्सर आशाओं की महफिल तलाश देकर जाती है।

जज्बात संग दिशाओं की सुबह से एहसासों की परख इरादा दिलाती है खयालों की कोशिश अक्सर धाराओं की पहचान तलाश देकर जाती है।

जज्बात संग दिशाओं की सुबह से दास्तानों की सरगम दिलाती है उजालों की कहानी अक्सर नजारों की आस तलाश देकर जाती है।

जज्बात संग दिशाओं की सुबह से खयालों की पहचान दिलाती है इरादों की सोच अक्सर अल्फाजों की दुनिया तलाश देकर जाती है।

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कविता. ५७५३. तलाश कोई उमंग संग।

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