Tuesday, 21 April 2026

कविता. ५८४९. खयालों की सरगम संग।

                         खयालों की सरगम संग।

खयालों की सरगम संग आवाजों की धून पहचान दिलाती है उजालों को सपनों की पुकार संग अल्फाज सुनाती है।

खयालों की सरगम संग कदमों की सोच अंदाज दिलाती है जज्बातों को बदलावों की उमंग संग अल्फाज सुनाती है।

खयालों की सरगम संग धाराओं की लहर कोशिश दिलाती है तरानों को इशारों की कहानी संग अल्फाज सुनाती है।

खयालों की सरगम संग एहसासों की परख तलाश दिलाती है अरमानों को लम्हों की कोशिश संग अल्फाज सुनाती है।

खयालों की सरगम संग राहों की रोशनी मुस्कान दिलाती है धाराओं को किनारों की पहचान संग अल्फाज सुनाती है।

खयालों की सरगम संग दिशाओं की आस अफसाना दिलाती है कदमों को नजारों की कहानी संग अल्फाज सुनाती है।

खयालों की सरगम संग दास्तानों की उमंग इशारा दिलाती है जज्बातों को अदाओं की धून संग अल्फाज सुनाती है।

खयालों की सरगम संग आशाओं की समझ उम्मीद दिलाती है इरादों को तरानों की अहमियत संग अल्फाज सुनाती है।

खयालों की सरगम संग अंदाजों की कहानी सुबह दिलाती है उम्मीदों को अरमानों की सोच संग अल्फाज सुनाती है।

खयालों की सरगम संग इशारों की आहट बदलाव दिलाती है नजारों को दिशाओं की कोशिश संग अल्फाज सुनाती है।

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कविता. ५८४९. खयालों की सरगम संग।

                         खयालों की सरगम संग। खयालों की सरगम संग आवाजों की धून पहचान दिलाती है उजालों को सपनों की पुकार संग अल्फाज सुनाती है।...