Thursday, 20 February 2025

कविता. ५४२४. आवाज की धून अक्सर।

                          आवाज की धून अक्सर।

आवाज की धून अक्सर बदलावों की रोशनी दिलाती है लम्हों को अल्फाजों की दुनिया सरगम सुनाती है नजारों की आस सुनाती है।

आवाज की धून अक्सर धाराओं की कोशिश दिलाती है जज्बातों को लहरों की पुकार दास्तान सुनाती है तरानों की आस सुनाती है।

आवाज की धून अक्सर आशाओं की महफिल दिलाती है अंदाजों को सपनों की पहचान उमंग सुनाती है राहों की आस सुनाती है।

आवाज की धून अक्सर इशारों की उम्मीद दिलाती है अरमानों को खयालों की अहमियत सौगात सुनाती है एहसासों की आस सुनाती है।

आवाज की धून अक्सर जज्बातों की मुस्कान दिलाती है कदमों को दिशाओं की कोशिश इरादा सुनाती है खयालों की आस सुनाती है।

आवाज की धून अक्सर अफसानों की सोच दिलाती है लहरों को किनारों की आहट अल्फाज सुनाती है कदमों की आस सुनाती है।

आवाज की धून अक्सर दास्तानों की रोशनी दिलाती है लम्हों को अदाओं की सरगम समझ सुनाती है उजालों की आस सुनाती है।

आवाज की धून अक्सर अरमानों की पुकार दिलाती है धाराओं को अंदाजों की पहचान सौगात सुनाती है उम्मीदों की आस सुनाती है।

आवाज की धून अक्सर नजारों की समझ दिलाती है इरादों को अदाओं की कोशिश दास्तान सुनाती है लहरों की आस सुनाती है।

आवाज की धून अक्सर खयालों की राह‌ दिलाती है उम्मीदों को दिशाओं की पुकार अफसाना सुनाती है कदमों की आस सुनाती है।

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