Monday, 31 March 2025

कविता. ५४६३. तरानों की सरगम अक्सर।

                        तरानों की सरगम अक्सर।

तरानों की सरगम अक्सर आवाज दिलाती है लहरों को खयालों की मुस्कान पहचान देकर जाती है इशारों की रोशनी दिलाती है।

तरानों की सरगम अक्सर तलाश दिलाती है कदमों को अल्फाजों की दुनिया इरादा देकर जाती है एहसासों की रोशनी दिलाती है।

तरानों की सरगम अक्सर खयाल दिलाती है किनारों को लम्हों की आहट समझ देकर जाती है जज्बातों की रोशनी दिलाती है।

तरानों की सरगम अक्सर परख दिलाती है उजालों को अरमानों की सोच बदलाव देकर जाती है लम्हों की रोशनी दिलाती है।

तरानों की सरगम अक्सर सोच दिलाती है आशाओं को अंदाजों की पुकार सुबह देकर जाती है अरमानों की रोशनी दिलाती है।

तरानों की सरगम अक्सर पुकार दिलाती है राहों को उजालों की आहट इशारा देकर जाती है अल्फाजों की रोशनी दिलाती है।

तरानों की सरगम अक्सर बदलाव दिलाती है कदमों को लहरों की कोशिश आहट देकर जाती है इरादों की रोशनी दिलाती है।

तरानों की सरगम अक्सर उमंग दिलाती है आवाजों को धाराओं की सोच अहमियत देकर जाती है उम्मीदों की रोशनी दिलाती है।

तरानों की सरगम अक्सर सपना दिलाती है नजारों को दिशाओं की समझ बदलाव देकर जाती है जज्बातों की रोशनी दिलाती है।

तरानों की सरगम अक्सर अंदाज दिलाती है एहसासों को कदमों की सौगात मुस्कान देकर जाती है खयालों की रोशनी दिलाती है।

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कविता. ५४६७. राहों को अरमानों की।

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