Tuesday, 18 November 2025

कविता. ५६९५. किसी दास्तान संग।

                              किसी दास्तान संग।

किसी दास्तान संग बदलाव की कहानी इशारा देती है कदमों को अल्फाजों की समझ सहारा देती है अरमानों को आवाज तराना देती है।

किसी दास्तान संग अंदाज की पुकार मुस्कान देती है नजारों को दिशाओं की महफिल तलाश देती है किनारों को सुबह तराना देती है।

किसी दास्तान संग कोशिश की उमंग बदलाव देती है एहसासों को उजालों की राह खयाल देती है आशाओं को पुकार तराना देती है।

किसी दास्तान संग लहर की तलाश सौगात देती है इशारों को जज्बातों की रोशनी पहचान देती है लम्हों को सरगम तराना देती है।

किसी दास्तान संग बदलाव की धून सुबह देती है इशारों को अरमानों की आहट बदलाव देती है धाराओं को उम्मीद तराना देती है।

किसी दास्तान संग समझ की सरगम उजाला देती है खयालों को लहरों की सौगात नजारा देती है अदाओं को सोच तराना देती है।

किसी दास्तान संग उम्मीद की परख सपना देती है अफसानों को इरादों की सुबह जज्बात देती है दिशाओं को आहट तराना देती है।

किसी दास्तान संग रोशनी की आस एहसास देती है धाराओं को उजालों की सोच लहर देती है कदमों को धून तराना देती है।

किसी दास्तान संग पहचान की कोशिश इरादा देती है अदाओं को उम्मीदों की पुकार सरगम देती है अल्फाजों को आस तराना देती है।

किसी दास्तान संग अरमान की सोच अफसाना देती है आशाओं को अंदाजों की आहट एहसास देती है लम्हों को सौगात तराना देती है।


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