Wednesday, 5 November 2025

कविता. ५६८२. दास्तान कोई कहानी।

                             दास्तान कोई कहानी।

दास्तान कोई कहानी सुनाती है तरानों को अफसानों की लहर पहचान दिलाती है किनारों की मुस्कान अल्फाज दिलाती है।

दास्तान कोई कोशिश सुनाती है नजारों को दिशाओं की महफिल उमंग दिलाती है आवाजों की धून अल्फाज दिलाती है।

दास्तान कोई सरगम सुनाती है अंदाजों को सपनों की सोच एहसास दिलाती है बदलावों की पहचान अल्फाज दिलाती है।

दास्तान कोई आवाज सुनाती है खयालों को जज्बातों की आस पुकार दिलाती है उजालों की सौगात अल्फाज दिलाती है।

दास्तान कोई अंदाज सुनाती है राहों को अरमानों की उम्मीद तलाश दिलाती है दिशाओं की महफिल अल्फाज दिलाती है।

दास्तान कोई सपना सुनाती है लम्हों को इशारों की सुबह तराना दिलाती है एहसासों की पहचान अल्फाज दिलाती है।

दास्तान कोई उमंग सुनाती है आशाओं को राहों की पहचान कोशिश दिलाती है अरमानों की सोच अल्फाज दिलाती है।

दास्तान कोई पुकार सुनाती है जज्बातों को बदलावों की रोशनी आवाज दिलाती है उजालों की सुबह अल्फाज दिलाती है।

दास्तान कोई आहट सुनाती है लहरों को आशाओं की समझ आस दिलाती है कदमों की अहमियत अल्फाज दिलाती है।

दास्तान कोई मुस्कान सुनाती है अरमानों को लम्हों की कोशिश खयाल दिलाती है धाराओं की सोच अल्फाज दिलाती है।



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