Wednesday, 10 June 2015

कविता ३ कुछ आँसू

                                                                 कुछ आँसू
कुछ आँसू हमे रुलाते है पर हमने देखे है लोग कई जो कहते है हमे तुम्हे बस यही आँसू क्यों रुलाते है
हम समज ना पाते है कभी वह लोग क्या चाहते है हमे किसीके गम का तो अफसोस है दोस्तों पर उन्हें तो किसीके आँसू भी न रुलाते है
कुछ गम पर रोये और कुछ पे नहीं पर हम तो वही करते है जो हम दिल से चाहते है हर मोड़ पर दिल रोया करे तो क्या खुशियों को भी रुलाते हम जाते है
कभी रोता है कभी हँसता है यह दिल अपना तभी तो जिन्दगी में संभल पाते है इनके कहने पर रोने लगे तो दोस्तों ये लोग तोफो में सिर्फ आँसू ही लाते है
हर सुबह हम इसी उम्मीद पर जागते है की आज आँसू से मुलाकात न हो और ये लोग उन्हें हऱ दम हमारे  साथ चाहते है
दूसरो के आँसू पर खुद तो आराम से अपने कमरो में हँसते है पर हर चेहरे पर अफ़सोस का नकाब चाहते है
जो सच दिखाते है उनके खिलाफ हर बार बात करते है हर पल इन्सान रोये ये जरुरी नहीं न दोस्तो पर कुछ लोग आँसू का दिखावा करते है
और हमसे भी वही चाहते है हम गम को साथ रखते नहीं पर कभी कभी ऐसा लगता है की ये गम भी खुशियों की तरह हमें चाहते है
पर फिर भी हमे अफ़सोस है हमे ए गम हम तुम्हे नहीं चाहते है हमने वादा किया है खुशियों  से उन्हें हम साथ देगे  तो हम तुम्हे नहीं चाह पाते है
हमने कई वादे किये है जिन्होंने हमे खुशियो से जोड रखा है दोस्तों तो गम पर हर बार ना रो पाते है
कभी कभी हमारी कोशिश है दोस्तों क्या हम उन्हें खुशियो में बदल पाते है हर मोड़ पर रोना  हमे मंजूर नहीं है
क्युकी दोस्तों हम तो सिर्फ हँसना चाहते है और रोते रहे हर पर तो कैसे खुशिको ला पायेगे कभी क्युकी बचपन से हमने सीखा है
बस यही जो  गम में हसते मुस्कुराते है वही औरो के जीवन में और अपने जीवन में खुशियाँ लाते है
तो आँसू हमारी गलती है उसे हम ना दोहराते है क्या गलत है दोस्तों जो हम अपनी गलती से सीख  लेते है
और उन्हें फिर दोहराने से कतराते है 

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