Monday, 31 October 2022

कविता. ४६११. जज्बात संग कोई सुबह कि।

                                  जज्बात संग कोई सुबह कि।

जज्बात संग कोई सुबह कि उमंग जताता है कदमों कि आहट अक्सर अरमानों कि पुकार सुनाती है लम्हों से आशाओं कि आस दिलाती है।

जज्बात संग कोई सुबह कि सपना जताता है किनारों कि सोच अक्सर अंदाजों कि सौगात सुनाती है तरानों से उम्मीदों कि पुकार दिलाती है।

जज्बात संग कोई सुबह कि लहर जताता है खयालों कि समझ अक्सर बदलावों कि पहचान सुनाती है आवाजों से अंदाजों कि कोशिश दिलाती है।

जज्बात संग कोई सुबह कि अरमान जताता है अदाओं कि परख अक्सर इशारों कि किनारा सुनाती है उजालों से कदमों कि अल्फाज दिलाती है।

जज्बात संग कोई सुबह कि उम्मीद जताता है नजारों कि राह अक्सर नजारों कि सौगात सुनाती है बदलावों से लम्हों कि अंदाज दिलाती है।

जज्बात संग कोई सुबह कि खयाल जताता है सपनों कि सौगात अक्सर इरादों कि बदलाव सुनाती है राहों से आशाओं कि आवाज दिलाती है।

जज्बात संग कोई सुबह कि परख जताता है इशारों कि पहचान अक्सर आवाजों कि धून सुनाती है अफसानों से दास्तानों कि सरगम दिलाती है।

जज्बात संग कोई सुबह कि कोशिश जताता है उम्मीदों कि समझ अक्सर इशारों कि धून सुनाती है अदाओं से इरादों कि लहर दिलाती है।

जज्बात संग कोई सुबह कि सोच जताता है अरमानों कि पुकार अक्सर दिशाओं कि समझ सुनाती है तरानों से आवाजों कि बदलाव दिलाती है।

जज्बात संग कोई सुबह कि पहचान जताता है नजारों कि सौगात अक्सर उम्मीदों कि सोच सुनाती है एहसासों से राहों कि समझ दिलाती है।

Sunday, 30 October 2022

कविता. ४६१०. एहसासों को अदाओं कि।

                                        एहसासों को अदाओं कि।

एहसासों को अदाओं कि सरगम सुबह दिलाती है जज्बातों कि समझ अक्सर अरमानों कि तलाश सुनाती है तरानों से अंदाजों कि सोच अल्फाज देती है।

एहसासों को अदाओं कि परख रोशनी दिलाती है कदमों कि आहट अक्सर सपनों कि सौगात सुनाती है लम्हों से आशाओं कि सरगम अल्फाज देती है।

एहसासों को अदाओं कि पुकार सोच दिलाती है लहरों कि कोशिश अक्सर कदमों कि आस सुनाती है इशारों से खयालों कि आहट अल्फाज देती है।

एहसासों को अदाओं कि कोशिश सपना दिलाती है नजारों कि सोच अक्सर उम्मीदों कि परख सुनाती है उजालों से आवाजों कि धून अल्फाज देती है।

एहसासों को अदाओं कि समझ अरमान दिलाती है राहों कि मुस्कान अक्सर दास्तानों कि आस सुनाती है अंदाजों से एहसासों कि समझ अल्फाज देती है।

एहसासों को अदाओं कि राह आवाज दिलाती है लम्हों कि रोशनी अक्सर दिशाओं कि समझ सुनाती है जज्बातों से इशारों कि सौगात अल्फाज देती है।

एहसासों को अदाओं कि आस परख दिलाती है दिशाओं कि समझ अक्सर नजारों कि मुस्कान सुनाती है दास्तानों से आशाओं कि सुबह अल्फाज देती है।

एहसासों को अदाओं कि पुकार इशारा दिलाती है उम्मीदों कि लहर अक्सर आशाओं कि सरगम सुनाती है तरानों से उम्मीदों कि समझ अल्फाज देती है।

एहसासों को अदाओं कि आवाज मुस्कान दिलाती है उजालों कि राह अक्सर खयालों कि समझ सुनाती है लम्हों से अफसानों कि सुबह अल्फाज देती है।

एहसासों को अदाओं कि पहचान तराना दिलाती है नजारों कि सौगात अक्सर इरादों कि कोशिश सुनाती है जज्बातों से लम्हों कि पुकार अल्फाज देती है।

Saturday, 29 October 2022

कविता. ४६०९. दिशाओं को कदमों कि।

                                    दिशाओं को कदमों कि।

दिशाओं को कदमों कि आहट अरमान सुनाती है तरानों पर एहसासों कि समझ इशारा दिलाती है सपनों को अल्फाजों कि मुस्कान दिलाती है।

दिशाओं को कदमों कि आस अफसाना सुनाती है जज्बातों पर उम्मीदों कि पहचान परख दिलाती है लम्हों को खयालों कि मुस्कान दिलाती है।

दिशाओं को कदमों कि लहर पहचान सुनाती है दास्तानों पर बदलावों कि सोच आवाज दिलाती है नजारों को अंदाजों कि मुस्कान दिलाती है।

दिशाओं को कदमों कि सौगात कोशिश सुनाती है राहों पर अफसानों कि सुबह कोशिश दिलाती है उजालों को किनारों कि मुस्कान दिलाती है।

दिशाओं को कदमों कि राह अल्फाज सुनाती है नजारों पर खयालों कि पुकार रोशनी दिलाती है आशाओं को बदलावों कि मुस्कान दिलाती है।

दिशाओं को कदमों कि उमंग परख सुनाती है रोशनी पर एहसासों कि समझ बदलाव दिलाती है अंदाजों को नजारों कि मुस्कान दिलाती है।

दिशाओं को कदमों कि सोच खयाल सुनाती है अंदाजों पर इशारों कि परख कोशिश दिलाती है अरमानों को उजालों कि मुस्कान दिलाती है।

दिशाओं को कदमों कि उम्मीद तलाश सुनाती है किनारों पर आवाजों कि धून पुकार दिलाती है अफसानों को राहों कि मुस्कान दिलाती है।

दिशाओं को कदमों कि सरगम आस सुनाती है दास्तानों पर उजालों कि सौगात सोच दिलाती है लम्हों को दास्तानों कि मुस्कान दिलाती है।

दिशाओं को कदमों कि आवाज जज्बात सुनाती है अदाओं पर अंदाजों कि परख रोशनी दिलाती है सपनों को एहसासों कि मुस्कान दिलाती है।

Friday, 28 October 2022

कविता. ४६०८. उजालों से उम्मीदों कि।

                                         उजालों से उम्मीदों कि।

उजालों से उम्मीदों कि लहर एहसास सुनाती है नजारों को राहों कि आस अरमान जगाती है लम्हों को किनारों कि सोच अफसाना दिलाती है।

उजालों से उम्मीदों कि कोशिश सपना सुनाती है लम्हों को खयालों कि समझ सरगम जगाती है तरानों को अरमानों कि सौगात अफसाना दिलाती है।

उजालों से उम्मीदों कि रोशनी सहारा सुनाती है बदलावों को लम्हों कि पुकार पहचान जगाती है कदमों को अदाओं कि परख अफसाना दिलाती है।

उजालों से उम्मीदों कि पुकार इशारा सुनाती है तरानों को जज्बातों कि सोच बदलाव जगाती है आशाओं को इरादों कि सुबह अफसाना दिलाती है।

उजालों से उम्मीदों कि आस मुस्कान सुनाती है खयालों को अंदाजों कि लहर अल्फाज जगाती है कोशिश को अदाओं कि पुकार अफसाना दिलाती है।

उजालों से उम्मीदों कि आवाज उमंग सुनाती है सपनों को इरादों कि तलाश इरादा जगाती है दास्तानों को आशाओं कि सरगम अफसाना दिलाती है।

उजालों से उम्मीदों कि समझ पहचान सुनाती है इशारों को लम्हों कि राह खयाल जगाती है कदमों को अंदाजों कि लहर अफसाना दिलाती है।

उजालों से उम्मीदों कि परख पुकार सुनाती है बदलावों को खयालों कि समझ तराना जगाती है किनारों को अदाओं कि राह अफसाना दिलाती है।

उजालों से उम्मीदों कि सुबह कोशिश सुनाती है दिशाओं को कदमों कि आहट उमंग जगाती है नजारों को इशारों कि लहर अफसाना दिलाती है।

उजालों से उम्मीदों कि सोच अरमान सुनाती है दास्तानों को अदाओं कि लहर मुस्कान जगाती है जज्बातों को कदमों कि सोच अफसाना दिलाती है।

Thursday, 27 October 2022

कविता. ४६०७. दास्तान को अंदाजों कि।

                                          दास्तान को अंदाजों कि।

दास्तान को अंदाजों कि समझ सपना दिलाती है दिशाएं कदमों कि आस से अरमान जगाती है लम्हों संग आशाओं कि मुस्कान सहारा देती है।

दास्तान को अंदाजों कि सौगात कोशिश दिलाती है अदाएं तरानों कि सुबह से पहचान जगाती है इशारों संग नजारों कि सोच सहारा देती है।

दास्तान को अंदाजों कि आहट तलाश दिलाती है लहरे इरादों कि सोच से अल्फाज जगाती है उजालों संग अफसानों कितत समझ सहारा देती है।

दास्तान को अंदाजों कि सुबह खयाल दिलाती है मुस्कान एहसासों कि तलाश से राह जगाती है उम्मीदों संग जज्बातों कि सुबह सहारा देती है।

दास्तान को अंदाजों कि राह आवाज दिलाती है इरादा उजालों कि पहचान से नजारा जगाती है खयालों संग अरमानों कि पुकार सहारा देती है।

दास्तान को अंदाजों कि कोशिश सरगम दिलाती है आवाज खयालों कि आस से दिशा जगाती है तरानों संग आशाओं कि सरगम सहारा देती है।

दास्तान को अंदाजों कि सौगात उमंग दिलाती है पुकार किनारों कि पहचान से अफसाना जगाती है इरादों संग कदमों कि आहट सहारा देती है।

दास्तान को अंदाजों कि परख इशारा दिलाती है आस कदमों कि आहट से अरमान जगाती है आवाजों संग दिशाओं कि समझ सहारा देती है।

दास्तान को अंदाजों कि आस तराना दिलाती है तलाश नजारों कि उमंग से एहसास जगाती है आशाओं संग इरादों कि कोशिश सहारा देती है।

दास्तान को अंदाजों कि सोच खयाल दिलाती है आहट उजालों कि राह से कोशिश जगाती है लम्हों संग आशाओं कि सरगम सहारा देती है।

Wednesday, 26 October 2022

कविता. ४६०६. राहों को अंदाजों कि।

                                      राहों को अंदाजों कि।

राहों को अंदाजों कि सौगात सपना दिलाती है दिशाओं को कदमों कि आहट खयाल सुनाती है तरानों को अरमानों कि पुकार सरगम सुनाती है।

राहों को अंदाजों कि सुबह दास्तान दिलाती है किनारों को अदाओं कि परख पहचान सुनाती है जज्बातों को उजालों कि सोच सरगम सुनाती है।

राहों को अंदाजों कि कोशिश आस दिलाती है तरानों को अरमानों कि पुकार मुस्कान सुनाती है इशारों को लम्हों कि आहट सरगम सुनाती है।

राहों को अंदाजों कि तलाश आवाज दिलाती है आशाओं को बदलावों कि सौगात एहसास सुनाती है उजालों को सपनों कि परख सरगम सुनाती है।

राहों को अंदाजों कि आस उमंग दिलाती है नजारों को लम्हों कि समझ कोशिश सुनाती है उम्मीदों को अफसानों कि सौगात सरगम सुनाती है।

राहों को अंदाजों कि उम्मीद परख दिलाती है दास्तानों को अदाओं कि आहट पुकार सुनाती है कदमों को लम्हों कि आवाज सरगम सुनाती है।

राहों को अंदाजों कि रोशनी नजारा दिलाती है इरादों को आशाओं कि सोच अरमान सुनाती है किनारों को अल्फाजों कि लहर सरगम सुनाती है।

राहों को अंदाजों कि मुस्कान अल्फाज दिलाती है दिशाओं को कदमों कि आस कोशिश सुनाती है इशारों को खयालों कि सौगात सरगम सुनाती है।

राहों को अंदाजों कि परख रोशनी दिलाती है इरादों को नजारों कि पहचान इशारा सुनाती है आवाजों को अदाओं कि परख सरगम सुनाती है।

राहों को अंदाजों कि सोच एहसास दिलाती है आशाओं को जज्बातों कि मुस्कान पुकार सुनाती है अदाओं को आवाजों कि धून सरगम सुनाती है।

Tuesday, 25 October 2022

कविता. ४६०५. कदमों से आवाजों कि।

                                     कदमों से आवाजों कि।

कदमों से आवाजों कि धून पहचान दिलाती है लम्हों संग जज्बातों कि पुकार रोशनी दिलाती है खयालों को अंदाजों कि सौगात सरगम सुनाती है।

कदमों से आवाजों कि आस सुबह दिलाती है लहरों संग बदलावों कि मुस्कान दास्तान दिलाती है नजारों को दिशाओं कि समझ सरगम सुनाती है।

कदमों से आवाजों कि राह परख दिलाती है उजालों संग आशाओं कि सोच अरमान दिलाती है एहसासों को उम्मीदों कि सोच सरगम सुनाती है।

कदमों से आवाजों कि सौगात तलाश दिलाती है नजारों संग अंदाजों कि आस लहर दिलाती है इशारों को किनारों कि मुस्कान सरगम सुनाती है।

कदमों से आवाजों कि पुकार दास्तान दिलाती है इशारों संग किनारों कि सौगात राह दिलाती है लहरों को अदाओं कि पहचान सरगम सुनाती है।

कदमों से आवाजों कि कोशिश सपना दिलाती है लम्हों संग जज्बातों कि सुबह बदलाव दिलाती है नजारों को राहों कि सौगात सरगम सुनाती है।

कदमों से आवाजों कि उम्मीद आस दिलाती है खयालों संग उजालों कि रोशनी किनारा दिलाती है अल्फाजों को तरानों कि सुबह सरगम सुनाती है।

कदमों से आवाजों कि सोच उमंग दिलाती है इशारों संग आशाओं कि सोच अरमान दिलाती है एहसासों को राहों कि तलाश सरगम सुनाती है।

कदमों से आवाजों कि परख उजाला दिलाती है लहरों संग बदलावों कि समझ राह दिलाती है तरानों को अरमानों कि आस सरगम सुनाती है।

कदमों से आवाजों कि पहचान इशारा दिलाती है जज्बातों संग आशाओं कि सोच पुकार दिलाती है उम्मीदों को किनारों कि मुस्कान सरगम सुनाती है। 


Monday, 24 October 2022

कविता. ४६०४. कोशिश को जज्बातों कि।

                                       कोशिश को जज्बातों कि।

कोशिश को जज्बातों कि मुस्कान सौगात दिलाती है लहरों को इशारों कि सरगम खयाल सुनाती है कदमों को अदाओं कि परख अहमियत दिलाती है।

कोशिश को जज्बातों कि आस रोशनी दिलाती है नजारों को दिशाओं कि पहचान इशारा सुनाती है लम्हों को दास्तानों कि सुबह अहमियत दिलाती है।

कोशिश को जज्बातों कि सोच अरमान दिलाती है एहसासों को उम्मीदों कि आस किनारा सुनाती है नजारों को राहों कि पहचान अहमियत दिलाती है।

कोशिश को जज्बातों कि राह नजारा दिलाती है लम्हों को दास्तानों कि आहट अदा सुनाती है तरानों को उम्मीदों कि लहर अहमियत दिलाती है।

कोशिश को जज्बातों कि सुबह सपना दिलाती है इशारों को लम्हों कि रोशनी आवाज सुनाती है अंदाजों को किनारों कि सोच अहमियत दिलाती है।

कोशिश को जज्बातों कि आस सरगम दिलाती है उजालों को सपनों कि लहर बदलाव सुनाती है आशाओं को तरानों कि आवाज अहमियत दिलाती है।

कोशिश को जज्बातों कि अदा तलाश दिलाती है लहरों को इशारों कि सोच अफसाना सुनाती है एहसासों को दास्तानों कि पुकार अहमियत दिलाती है।

कोशिश को जज्बातों कि आवाज पहचान दिलाती है उम्मीदों को कदमों कि आहट अंदाज सुनाती है नजारों को खयालों कि समझ अहमियत दिलाती है।

कोशिश को जज्बातों कि दास्तान तराना दिलाती है लहरों को अल्फाजों कि समझ पुकार सुनाती है लम्हों को इरादों कि सौगात अहमियत दिलाती है।

कोशिश को जज्बातों कि उमंग अरमान दिलाती है नजारों को दिशाओं कि पहचान उजाला सुनाती है आवाजों को अदाओं कि सरगम अहमियत दिलाती है।


Sunday, 23 October 2022

कविता. ४६०३. किनारों से कोशिश अक्सर।

                                 किनारों से कोशिश अक्सर।

किनारों से कोशिश अक्सर एहसासों कि रोशनी दिलाती है लम्हों को जज्बातों कि मुस्कान तलाश देकर जाती है नजारों कि सौगात से अफसानों कि पुकार आती है।

किनारों से कोशिश अक्सर अरमानों कि सुबह दिलाती है अदाओं को तरानों कि सुबह पहचान देकर जाती है उजालों कि सुबह से अंदाजों कि पुकार आती है।

किनारों से कोशिश अक्सर राहों कि बदलाव दिलाती है इशारों को दास्तानों कि परख अहमियत देकर जाती है खयालों कि समझ से कदमों कि पुकार आती है।

किनारों से कोशिश अक्सर आशाओं कि आस दिलाती है अंदाजों को राहों कि रोशनी आवाज देकर जाती है बदलावों कि सोच से दिशाओं कि पुकार आती है।

किनारों से कोशिश अक्सर खयालों कि समझ दिलाती है लहरों को इशारों कि सौगात अल्फाज देकर जाती है अरमानों कि सुबह से तरानों कि पुकार आती है।

किनारों से कोशिश अक्सर अंदाजों कि सौगात दिलाती है लम्हों को खयालों कि सोच बदलाव देकर जाती है उजालों कि रोशनी से जज्बातों कि पुकार आती है।

किनारों से कोशिश अक्सर राहों कि मुस्कान दिलाती है नजारों को दिशाओं कि सुबह दास्तान देकर जाती है नजारों कि सौगात से उम्मीदों कि पुकार आती है।

किनारों से कोशिश अक्सर कदमों कि सोच दिलाती है आशाओं को जज्बातों कि आवाज सरगम देकर जाती है इशारों कि पहचान से अंदाजों कि पुकार आती है।

किनारों से कोशिश अक्सर लम्हों कि आहट दिलाती है इरादों को अरमानों कि सोच अफसाना देकर जाती है कदमों कि आहट से इशारों कि पुकार आती है।

किनारों से कोशिश अक्सर उजालों कि राह दिलाती है अदाओं को दिशाओं कि सुबह परख देकर जाती है दास्तानों कि आस से अल्फाजों कि पुकार आती है।

Saturday, 22 October 2022

कविता. ४६०२. सपनों को एहसासों कि।

                                      सपनों को एहसासों कि।

सपनों को एहसासों कि रोशनी आस सुनाती है दिशाओं को कदमों कि आहट अफसाना दिलाती है लम्हों से आशाओं कि सरगम देकर जाती है।

सपनों को एहसासों कि मुस्कान नजारा सुनाती है तरानों को अरमानों कि सौगात कोशिश दिलाती है लहरों से अदाओं कि आवाज देकर जाती है।

सपनों को एहसासों कि सुबह दास्तान सुनाती है नजारों को खयालों कि समझ रोशनी दिलाती है जज्बातों से अंदाजों कि सौगात देकर जाती है।

सपनों को एहसासों कि उमंग पुकार सुनाती है आशाओं को बदलावों कि सोच अरमान दिलाती है खयालों से उम्मीदों कि पहचान देकर जाती है।

सपनों को एहसासों कि समझ पहचान सुनाती है उजालों को अदाओं कि परख रोशनी दिलाती है इशारों से आशाओं कि सुबह देकर जाती है।

सपनों को एहसासों कि तलाश सरगम सुनाती है राहों को अंदाजों कि आस पहचान दिलाती है उम्मीदों से इरादों कि अहमियत देकर जाती है।

सपनों को एहसासों कि लहर खयाल सुनाती है लम्हों को किनारों कि मुस्कान दास्तान दिलाती है नजारों से कदमों कि आहट देकर जाती है।

सपनों को एहसासों कि राह आवाज सुनाती है उम्मीदों को तरानों कि रोशनी अल्फाज दिलाती है लहरों से दिशाओं कि कोशिश देकर जाती है।

सपनों को एहसासों कि पुकार आस सुनाती है नजारों को दिशाओं कि सुबह अफसाना दिलाती है इशारों से अरमानों कि पहचान देकर जाती है।

सपनों को एहसासों कि परख किनारा सुनाती है तरानों को उम्मीदों कि लहर मुस्कान दिलाती है दिशाओं से आशाओं कि सरगम देकर जाती है।

Friday, 21 October 2022

कविता. ४६०१. बदलावों कि कोशिश।

                                           बदलावों कि कोशिश।

बदलावों कि कोशिश समझ देती है कदमों कि आहट से अरमानों कि सुबह दास्तान दिलाती है इशारों को लम्हों कि पहचान खयाल सुनाती है।

बदलावों कि कोशिश रोशनी देती है नजारों कि सोच से अल्फाजों कि मुस्कान अफसाना दिलाती है जज्बातों को अंदाजों कि राह खयाल सुनाती है।

बदलावों कि कोशिश सौगात देती है इशारों कि आस से किनारों कि परख पुकार दिलाती है अंदाजों को आशाओं कि आवाज खयाल सुनाती है।

बदलावों कि कोशिश आस देती है जज्बातों कि सुबह से सपनों कि लहर किनारा दिलाती है अरमानों को इशारों कि पुकार खयाल सुनाती है।

बदलावों कि कोशिश सोच देती है तरानों कि परख से उजालों कि आवाज दास्तान दिलाती है अफसानों को दिशाओं कि समझ खयाल सुनाती है।

बदलावों कि कोशिश उमंग देती है राहों कि सोच से उम्मीदों कि सौगात पहचान दिलाती है लम्हों को अरमानों कि सरगम खयाल सुनाती है।

बदलावों कि कोशिश उम्मीद देती है आशाओं कि आस से लम्हों कि रोशनी किनारा दिलाती है तरानों को आवाजों कि धून खयाल सुनाती है।

बदलावों कि कोशिश अरमान देती है अंदाजों कि सौगात से राहों कि मुस्कान पुकार दिलाती है नजारों को अदाओं कि परख खयाल सुनाती है।

बदलावों कि कोशिश उजाला देती है कदमों कि समझ से इरादों कि सुबह पहचान दिलाती है एहसासों को किनारों कि सोच खयाल सुनाती है।

बदलावों कि कोशिश तलाश देती है सपनों कि सौगात से अदाओं कि समझ सोच दिलाती है लहरों को इशारों कि रोशनी खयाल सुनाती है।

Thursday, 20 October 2022

कविता. ४६००. दिशाओं कि कहानी से।

                                     दिशाओं कि कहानी से।

दिशाओं कि कहानी से पुकार इशारा देती है लम्हों को खयालों कि समझ आस सुनाती है तरानों पर एहसासों कि सरगम मुस्कान दिलाती है।

दिशाओं कि कहानी से आस अफसाना देती है नजारों को राहों कि आवाज दास्तान सुनाती है लहरों पर अल्फाजों कि कोशिश मुस्कान दिलाती है।

दिशाओं कि कहानी से अदा अरमान देती है जज्बातों को किनारों कि सोच तलाश सुनाती है नजारों पर उजालों कि सुबह मुस्कान दिलाती है।

दिशाओं कि कहानी से आवाज खयाल देती है लहरों को इशारों कि सौगात कोशिश सुनाती है उम्मीदों पर अरमानों कि पुकार मुस्कान दिलाती है।

दिशाओं कि कहानी से लहर उजाला देती है इरादों को खयालों कि परख सहारा सुनाती है कदमों पर जज्बातों कि सोच मुस्कान दिलाती है।

दिशाओं कि कहानी से पहचान कोशिश देती है किनारों को सपनों कि समझ सुबह सुनाती है तरानों पर बदलावों कि राह मुस्कान दिलाती है।

दिशाओं कि कहानी से परख आस देती है लम्हों को दास्तानों कि सौगात अफसाना सुनाती है इरादों पर आशाओं कि सुबह मुस्कान दिलाती है।

दिशाओं कि कहानी से सुबह दास्तान देती है उम्मीदों को कदमों कि आहट अल्फाज सुनाती है नजारों पर अंदाजों कि सरगम मुस्कान दिलाती है।

दिशाओं कि कहानी से राह जज्बात देती है तरानों को अरमानों कि उमंग पहचान सुनाती है आशाओं पर बदलावों कि सोच मुस्कान दिलाती है।

दिशाओं कि कहानी से सरगम सपना देती है इशारों को आशाओं कि सोच सौगात सुनाती है अदाओं पर नजारों कि पुकार मुस्कान दिलाती है।

Wednesday, 19 October 2022

कविता. ४५९९. कदमों से मुस्कान संग।

                                        कदमों से मुस्कान संग।

कदमों से मुस्कान संग अरमानों कि पुकार सरगम दिलाती है लम्हों को खयालों कि समझ सपना सुनाती है तरानों को इशारों कि सौगात अहमियत देती है।

कदमों से मुस्कान संग उम्मीदों कि लहर अल्फाज दिलाती है नजारों को दिशाओं कि सोच कोशिश सुनाती है अदाओं को इशारों कि सुबह अहमियत देती है।

कदमों से मुस्कान संग उजालों कि परख रोशनी दिलाती है बदलावों को किनारों कि सुबह पहचान सुनाती है अंदाजों को किनारों कि कोशिश अहमियत देती है।

कदमों से मुस्कान संग जज्बातों कि सोच आस दिलाती है इरादों को आशाओं कि सरगम पुकार सुनाती है दिशाओं को लहरों कि सोच अहमियत देती है।

कदमों से मुस्कान संग नजारों कि सुबह आवाज दिलाती है जज्बातों को अंदाजों कि आस सौगात सुनाती है उजालों को सपनों कि परख अहमियत देती है।

कदमों से मुस्कान संग राहों कि पुकार सरगम दिलाती है दास्तानों को एहसासों कि खयाल सोच सुनाती है जज्बातों को अंदाजों कि आस अहमियत देती है।

कदमों से मुस्कान संग उम्मीदों कि लहर आस दिलाती है उजालों को बदलावों कि सौगात उमंग सुनाती है लम्हों को खयालों कि समझ अहमियत देती है।

कदमों से मुस्कान संग दास्तानों कि परख रोशनी दिलाती है लम्हों को अरमानों कि पुकार एहसास सुनाती है खयालों को इशारों कि कोशिश अहमियत देती है।

कदमों से मुस्कान संग नजारों कि पहचान इशारा दिलाती है किनारों को अल्फाजों कि राह अरमान सुनाती है अदाओं को दिशाओं कि लहर अहमियत देती है।

कदमों से मुस्कान संग इरादों कि सोच अफसाना दिलाती है नजारों को दिशाओं कि समझ बदलाव सुनाती है आशाओं को दास्तानों कि रोशनी अहमियत देती है।

Tuesday, 18 October 2022

कविता. ४५९८. उजालों कि राह अक्सर।

                                         उजालों कि राह अक्सर।

उजालों कि राह अक्सर खयालों कि कोशिश तराने देती है अदाओं को लहरों कि सरगम अहमियत सुनाती है इशारों को अंदाजों कि आस दिलाती है।

उजालों कि राह अक्सर उम्मीदों कि लहर इशारे देती है कदमों को अल्फाजों कि पहचान अरमान सुनाती है जज्बातों को कदमों कि आस दिलाती है।

उजालों कि राह अक्सर तरानों कि सुबह दास्ताने देती है खयालों को नजारों कि सोच कोशिश सुनाती है तरानों को इरादों कि आस दिलाती है।

उजालों कि राह अक्सर दिशाओं कि समझ इरादे देती है किनारों को सपनों कि सौगात तलाश सुनाती है लम्हों को दिशाओं कि आस दिलाती है।

उजालों कि राह अक्सर नजारों कि सोच किनारे देती है अदाओं को अंदाजों कि सुबह परख सुनाती है आवाजों को बदलावों कि आस दिलाती है।

उजालों कि राह अक्सर इशारों कि मुस्कान अफसाने देती है कदमों को अदाओं कि पुकार आवाज सुनाती है इशारों को लम्हों कि आस दिलाती है।

उजालों कि राह अक्सर अदाओं कि सौगात नजारे देती है आशाओं को बदलावों कि सोच खयाल सुनाती है दिशाओं को कदमों कि आस दिलाती है।

उजालों कि राह अक्सर आवाजों कि धून इशारे देती है नजारों को दिशाओं कि अहमियत अफसाना सुनाती है तरानों को अरमानों कि आस दिलाती है।

उजालों कि राह अक्सर कदमों कि आहट उम्मीदे देती है किनारों को लहरों कि सुबह दास्तान सुनाती है एहसासों को खयालों कि आस दिलाती है।

उजालों कि राह अक्सर सपनों कि लहर आवाजे देती है तरानों को अरमानों कि पुकार पहचान सुनाती है आशाओं को जज्बातों कि आस दिलाती है।

Monday, 17 October 2022

कविता. ४५९७. किनारों से आशाओं कि।

                                             किनारों से आशाओं कि।

किनारों से आशाओं कि लहर आस सुनाती है कदमों कि आहट अक्सर अरमानों कि पुकार संग रोशनी दिलाती है खयालों को अंदाजों कि सौगात अल्फाज देती है।

किनारों से आशाओं कि सरगम पहचान सुनाती है दिशाओं कि समझ अक्सर जज्बातों कि सोच संग राह दिलाती है तरानों को उम्मीदों कि सुबह अल्फाज देती है।

किनारों से आशाओं कि कोशिश राह सुनाती है आवाजों कि धून अक्सर एहसासों कि मुस्कान संग तलाश दिलाती है नजारों को खयालों कि सरगम अल्फाज देती है।

किनारों से आशाओं कि सोच पुकार सुनाती है अदाओं कि परख अक्सर खयालों कि सौगात संग कोशिश दिलाती है इशारों को लम्हों कि आहट अल्फाज देती है।

किनारों से आशाओं कि पहचान उमंग सुनाती है लहरों कि सरगम अक्सर सपनों कि आस संग बदलाव दिलाती है कदमों को दास्तानों कि परख अल्फाज देती है।

किनारों से आशाओं कि बदलाव सपना सुनाती है उजालों कि सुबह अक्सर अंदाजों कि सरगम संग तलाश दिलाती है आवाजों को अदाओं कि पुकार अल्फाज देती है।

किनारों से आशाओं कि सौगात तलाश सुनाती है नजारों कि सोच अक्सर दास्तानों कि परख संग सहारा दिलाती है लम्हों को खयालों कि सोच अल्फाज देती है।

किनारों से आशाओं कि सरगम कोशिश सुनाती है तरानों कि सुबह अक्सर दिशाओं कि सोच संग इशारा दिलाती है नजारों को उजालों कि सुबह अल्फाज देती है।

किनारों से आशाओं कि पुकार खयाल सुनाती है इरादों कि सौगात अक्सर जज्बातों कि मुस्कान संग पहचान दिलाती है अदाओं को नजारों कि सोच अल्फाज देती है।

किनारों से आशाओं कि सुबह दास्तान सुनाती है एहसासों कि रोशनी अक्सर अरमानों कि राह अफसाना दिलाती है खयालों को अंदाजों कि समझ अल्फाज देती है।

Sunday, 16 October 2022

कविता. ४५९६. आशाओं कि सरगम से।

                                           आशाओं कि सरगम से।

आशाओं कि सरगम से दिशाओं को कदमों कि आवाज सरगम सुनाती है दास्तानों कि मुस्कान अक्सर उम्मीदों से तलाश कि पहचान दिलाती है।

आशाओं कि सरगम से खयालों को नजारों कि पुकार रोशनी दिलाती है लहरों कि कोशिश अक्सर बदलावों से खयाल कि पहचान दिलाती है।

आशाओं कि सरगम से अंदाजों को अदाओं कि परख सौगात दिलाती है नजारों कि समझ अक्सर जज्बातों से लहर कि पहचान दिलाती है।

आशाओं कि सरगम से राहों को उजालों कि सुबह दास्तान सुनाती है किनारों कि सोच अक्सर इशारों से राह कि पहचान दिलाती है।

आशाओं कि सरगम से तरानों को अरमानों कि रोशनी आस सुनाती है खयालों कि सौगात अक्सर इरादों से उमंग कि पहचान दिलाती है।

आशाओं कि सरगम से आवाजों को बदलावों कि सोच कोशिश सुनाती है नजारों कि उमंग अक्सर खयालों से अल्फाज कि पहचान दिलाती है।

आशाओं कि सरगम से लम्हों को दिशाओं कि पुकार सौगात सुनाती है लम्हों कि पुकार अक्सर दास्तानों से एहसास कि पहचान दिलाती है।

आशाओं कि सरगम से अंदाजों को राहों कि सुबह अरमान सुनाती है तरानों कि सुबह अक्सर दिशाओं से कोशिश कि पहचान दिलाती है।

आशाओं कि सरगम से लहरों को नजारों कि सोच आवाज सुनाती है दास्तानों कि परख अक्सर जज्बातों से अंदाज कि पहचान दिलाती है।

आशाओं कि सरगम से खयालों को लहरों कि सौगात सपना सुनाती है उजालों कि सोच अक्सर अरमानों से आस कि पहचान दिलाती है।

Saturday, 15 October 2022

कविता. ४५९५. अफसानों को किनारों कि।

                                     अफसानों को किनारों कि।

अफसानों को किनारों कि लहर इशारा देती है सपनों को लम्हों कि समझ इरादा दिलाती है अंदाजों कि तलाश अक्सर अदाओं कि कोशिश संग एहसास देती है।

अफसानों को किनारों कि मुस्कान अल्फाज देती है दिशाओं को कदमों कि आहट खयाल दिलाती है नजारों कि सोच अक्सर दास्तानों कि राह संग एहसास देती है।

अफसानों को किनारों कि सोच सपना देती है आवाजों को बदलावों कि सौगात कोशिश दिलाती है जज्बातों कि सुबह अक्सर तरानों कि सुबह संग एहसास देती है।

अफसानों को किनारों कि पहचान खयाल देती है अदाओं को दिशाओं कि समझ सरगम दिलाती है दास्तानों कि परख अक्सर आशाओं कि सोच संग एहसास देती है।

अफसानों को किनारों कि पुकार कोशिश देती है अंदाजों को खयालों कि रोशनी तराना दिलाती है उजालों कि सरगम अक्सर राहों कि पुकार संग एहसास देती है।

अफसानों को किनारों कि परख आस देती है अरमानों को नजारों कि सोच अहमियत दिलाती है उम्मीदों कि सुबह अक्सर सपनों कि लहर संग एहसास देती है।

अफसानों को किनारों कि आवाज तराना देती है खयालों को अंदाजों कि आस सुबह दिलाती है नजारों कि पहचान अक्सर इरादों कि तलाश संग एहसास देती है।

अफसानों को किनारों कि समझ दास्तान देती है लम्हों को दिशाओं कि सौगात कोशिश दिलाती है लहरों कि परख अक्सर जज्बातों कि सरगम संग एहसास देती है।

अफसानों को किनारों कि उमंग तलाश देती है नजारों को अदाओं कि सोच बदलाव दिलाती है कदमों कि आस अक्सर दास्तानों कि परख संग एहसास देती है।

अफसानों को किनारों कि राह खयाल देती है आशाओं को आवाजों कि धून पुकार दिलाती है दास्तानों कि सोच अक्सर उम्मीदों कि सुबह संग एहसास देती है।

Friday, 14 October 2022

कविता. ४५९४. जज्बात कि सौगात अक्सर।

                                 जज्बात कि सौगात अक्सर।

जज्बात कि सौगात अक्सर आशाओं कि खयाल दिलाती है लहरों को राहों कि पहचान किनारा दिलाती है कोशिश से आवाजों कि धून दिलाती है।

जज्बात कि सौगात अक्सर अदाओं कि परख दिलाती है कदमों को उजालों कि अहमियत उजाला दिलाती है इशारों से खयालों कि धून दिलाती है।

जज्बात कि सौगात अक्सर राहों कि सरगम दिलाती है किनारों को सपनों कि सरगम आस दिलाती है अल्फाजों से लम्हों कि धून दिलाती है।

जज्बात कि सौगात अक्सर दिशाओं कि समझ दिलाती है दिशाओं को बदलावों कि सोच रोशनी दिलाती है नजारों से कदमों कि धून दिलाती है।

जज्बात कि सौगात अक्सर तरानों कि पहचान दिलाती है इशारों को दास्तानों कि परख अदा दिलाती है राहों से अफसानों कि धून दिलाती है।

जज्बात कि सौगात अक्सर अंदाजों कि सोच दिलाती है लम्हों को खयालों कि समझ किनारा दिलाती है अदाओं से इरादों कि धून दिलाती है।

जज्बात कि सौगात अक्सर नजारों कि पुकार दिलाती है दिशाओं को कदमों कि आहट अल्फाज दिलाती है उजालों से उम्मीदों कि धून दिलाती है।

जज्बात कि सौगात अक्सर उम्मीदों कि सरगम दिलाती है नजारों को आशाओं कि सुबह दास्तान दिलाती है अदाओं से अरमानों कि धून दिलाती है।

जज्बात कि सौगात अक्सर एहसासों कि रोशनी दिलाती है लहरों को इशारों कि सोच कोशिश दिलाती है लम्हों से नजारों कि धून दिलाती है।

जज्बात कि सौगात अक्सर इरादों कि किनारा दिलाती है अंदाजों को खयालों कि पहचान परख दिलाती है आशाओं से दास्तानों कि धून दिलाती है।


Thursday, 13 October 2022

कविता. ४५९३. किनारों संग सपनों से।

                                           किनारों संग सपनों से।

किनारों संग सपनों से एहसासों कि लहर तलाश दिलाती है कदमों को अदाओं कि परख कोशिश सुनाती है लम्हों को खयालों कि सरगम सुनाती है।

किनारों संग सपनों से आवाजों कि धून पुकार दिलाती है नजारों को राहों कि पहचान खयाल सुनाती है उजालों को बदलावों कि सरगम सुनाती है।

किनारों संग सपनों से आशाओं कि राह आस दिलाती है लहरों को अफसानों कि समझ तलाश सुनाती है उम्मीदों को कदमों कि सरगम सुनाती है।

किनारों संग सपनों से अंदाजों कि समझ आवाज दिलाती है उजालों को कदमों कि आहट परख सुनाती है अल्फाजों को राहों कि सरगम सुनाती है।

किनारों संग सपनों से दिशाओं कि सोच अरमान दिलाती है आवाजों को खयालों कि कोशिश लहर सुनाती है उम्मीदों को इशारों कि सरगम सुनाती है।

किनारों संग सपनों से नजारों कि सौगात पहचान दिलाती है जज्बातों को इरादों कि पुकार रोशनी सुनाती है बदलावों को इरादों कि सरगम सुनाती है।

किनारों संग सपनों से उम्मीदों कि पुकार अरमान दिलाती है कदमों को नजारों कि सौगात आस सुनाती है अंदाजों को दास्तानों कि सरगम सुनाती है।

किनारों संग सपनों से इशारों कि रोशनी सुबह दिलाती है लहरों को आशाओं कि पहचान अहमियत सुनाती है उजालों को राहों कि सरगम सुनाती है।

किनारों संग सपनों से आशाओं कि आस दिलाती है खयालों को एहसासों कि रोशनी अल्फाज सुनाती है कदमों को लहरों कि सरगम सुनाती है।

किनारों संग सपनों से दिशाओं कि सोच दिलाती है नजारों को कदमों कि समझ अहमियत सुनाती है लम्हों को इशारों कि सरगम सुनाती है।

Wednesday, 12 October 2022

कविता. ४५९२. दिशाओं को कदमों कि आहट।

                                 दिशाओं को कदमों कि आहट।

दिशाओं को कदमों कि आहट अक्सर अदाओं कि लहर दिलाती है अंदाजों को किनारों कि मुस्कान सहारा दिलाती है लम्हों कि परख देती है।

दिशाओं को कदमों कि आहट अक्सर सपनों कि कोशिश दिलाती है लम्हों को अरमानों कि पुकार सरगम दिलाती है नजारों कि परख देती है।

दिशाओं को कदमों कि आहट अक्सर नजारों कि सोच दिलाती है किनारों को अल्फाजों कि राह अफसाना दिलाती है खयालों कि परख देती है।

दिशाओं को कदमों कि आहट अक्सर बदलावों कि समझ दिलाती है नजारों को राहों कि पहचान सुबह दिलाती है जज्बातों कि परख देती है।

दिशाओं को कदमों कि आहट अक्सर अफसानों कि राह दिलाती है किनारों को सपनों कि कोशिश अल्फाज दिलाती है उजालों कि परख देती है।

दिशाओं को कदमों कि आहट अक्सर लहरों कि सरगम दिलाती है उम्मीदों को किनारों कि मुस्कान रोशनी दिलाती है एहसासों कि परख देती है।

दिशाओं को कदमों कि आहट अक्सर एहसासों कि रोशनी दिलाती है लम्हों को खयालों कि समझ सरगम दिलाती है किनारों कि परख देती है।

दिशाओं को कदमों कि आहट अक्सर उजालों कि सौगात दिलाती है इशारों को दास्तानों कि पहचान अल्फाज दिलाती है आशाओं कि परख देती है।

दिशाओं को कदमों कि आहट अक्सर उम्मीदों कि समझ दिलाती है बदलावों को लम्हों कि पुकार अहमियत दिलाती है अंदाजों कि परख देती है।

दिशाओं को कदमों कि आहट अक्सर अरमानों कि कहानी दिलाती है दास्तानों को अदाओं कि सुबह अफसाना दिलाती है एहसासों कि परख देती है।

Tuesday, 11 October 2022

कविता. ४५९१. सपनों से आवाजों कि।

                                              सपनों से आवाजों कि।

सपनों से आवाजों कि पुकार अरमान दिलाती है जज्बातों कि समझ अक्सर इशारे देती है कदमों को अदाओं कि मुस्कान सहारा देती है।

सपनों से आवाजों कि सरगम आस दिलाती है लहरों कि पहचान अक्सर राहे देती है किनारों को जज्बातों कि सोच सहारा देती है।

सपनों से आवाजों कि धून पहचान दिलाती है लम्हों कि रोशनी अक्सर नजारे देती है दास्तानों को एहसासों कि समझ सहारा देती है।

सपनों से आवाजों कि लहर अफसाना दिलाती है उम्मीदों कि सौगात अक्सर किनारे देती है उजालों को आशाओं कि उमंग सहारा देती है।

सपनों से आवाजों कि कोशिश सुबह दिलाती है दिशाओं कि सरगम अक्सर तराने देती है खयालों को अंदाजों कि आस सहारा देती है।

सपनों से आवाजों कि रोशनी लहर दिलाती है दास्तानों कि सोच अक्सर उजाले देती है इशारों को बदलावों कि सौगात सहारा देती है।

सपनों से आवाजों कि उमंग अल्फाज दिलाती है एहसासों कि कोशिश अक्सर लम्हे देती है अफसानों को दिशाओं कि पहचान सहारा देती है।

सपनों से आवाजों कि सुबह आस दिलाती है कदमों कि आहट अक्सर दास्ताने देती है अंदाजों को किनारों कि सोच सहारा देती है।

सपनों से आवाजों कि दास्तान उमंग दिलाती है अरमानों कि राह अक्सर उम्मीदे देती है दिशाओं को नजारों कि आस सहारा देती है।

सपनों से आवाजों कि समझ अंदाज दिलाती है उम्मीदों कि लहर अक्सर अफसाने देती है कदमों को खयालों कि परख सहारा देती है।

Monday, 10 October 2022

कविता. ४५९०. अंदाजों को किनारों कि।

                                    अंदाजों को किनारों कि।

अंदाजों को किनारों कि सोच सरगम सुनाती है नजारों कि पुकार एहसास देकर जाती है जज्बातों कि मुस्कान अक्सर उम्मीदों कि लहर दिलाती है।

अंदाजों को किनारों कि सुबह दास्तान सुनाती है लम्हों कि रोशनी अफसाना देकर जाती है दिशाओं कि समझ अक्सर बदलावों कि सौगात दिलाती है।

अंदाजों को किनारों कि पहचान इशारा सुनाती है इशारों कि कोशिश तलाश देकर जाती है आशाओं कि सरगम अक्सर उजालों कि पुकार दिलाती है।

अंदाजों को किनारों कि सौगात खयाल सुनाती है तरानों कि सुबह दास्तान देकर जाती है नजारों कि आस अक्सर इरादों कि आवाज दिलाती है।

अंदाजों को किनारों कि परख उमंग सुनाती है इरादों कि सोच आस देकर जाती है अरमानों कि पुकार अक्सर उम्मीदों कि पहचान दिलाती है।

अंदाजों को किनारों कि अरमान आस सुनाती है कदमों कि आहट पुकार देकर जाती है आवाजों कि धून अक्सर खयालों कि समझ दिलाती है।

अंदाजों को किनारों कि राह अफसाना सुनाती है दास्तानों कि परख मुस्कान देकर जाती है इशारों कि सौगात अक्सर उजालों कि सुबह दिलाती है।

अंदाजों को किनारों कि राह कोशिश सुनाती है दिशाओं कि समझ सपना देकर जाती है अल्फाजों कि पहचान अक्सर तरानों कि सोच दिलाती है।

अंदाजों को किनारों कि पहचान इशारा सुनाती है राहों कि परख अरमान देकर जाती है आशाओं कि सरगम अक्सर बदलावों कि समझ दिलाती है।

अंदाजों को किनारों कि समझ आवाज सुनाती है कदमों कि आहट अल्फाज देकर जाती है तरानों कि सुबह अक्सर दिशाओं कि पहचान दिलाती है।

Sunday, 9 October 2022

कविता. ४५८९. किनारों को अल्फाजों कि।

                                            किनारों को अल्फाजों कि।

किनारों को अल्फाजों कि मुस्कान सहारा देती है नजारों को दिशाओं कि आस धाराएं देती है खयालों को अंदाजों कि आस एहसास देती है।

किनारों को अल्फाजों कि कोशिश आवाज देती है लहरों को इशारों कि सौगात सरगम देती है अदाओं को तरानों कि सोच एहसास देती है।

किनारों को अल्फाजों कि रोशनी अरमान देती है कदमों को उजालों कि सुबह दास्तान देती है जज्बातों को इशारों कि समझ एहसास देती है।

किनारों को अल्फाजों कि राह अफसाना देती है उम्मीदों को अदाओं कि परख अहमियत देती है कदमों को आशाओं कि मुस्कान एहसास देती है।

किनारों को अल्फाजों कि सुबह दास्तान देती है कोशिश को इरादों कि रोशनी आवाज देती है लम्हों को अरमानों कि पुकार एहसास देती है।

किनारों को अल्फाजों कि तलाश इशारा देती है राहों को अंदाजों कि सोच आस देती है लहरों को कदमों कि आहट एहसास देती है।

किनारों को अल्फाजों कि समझ सपना देती है जज्बातों को आशाओं कि सरगम राह देती है नजारों को दिशाओं कि समझ एहसास देती है।

किनारों को अल्फाजों कि आस आवाज देती है उजालों को सपनों कि लहर बदलाव देती है इरादों को दास्तानों कि परख एहसास देती है।

किनारों को अल्फाजों कि पुकार रोशनी देती है उमंग को राहों कि अहमियत नजारा देती है इशारों को आवाजों कि सोच एहसास देती है।

किनारों को अल्फाजों कि राह तराना देती है कदमों को अदाओं कि सौगात सरगम देती है कोशिश को जज्बातों कि मुस्कान एहसास देती है।

Saturday, 8 October 2022

कविता. ४५८८. किनारों से कोशिश अक्सर।

                                       किनारों से कोशिश अक्सर।

किनारों से कोशिश अक्सर आशाओं कि तलाश दिलाती है लम्हों को एहसासों कि रोशनी खयाल देती है नजारों को दिशाओं कि समझ सुनाती है।

किनारों से कोशिश अक्सर आवाजों कि धून दिलाती है दास्तानों को अदाओं कि परख कोशिश देती है तरानों को उम्मीदों कि समझ सुनाती है।

किनारों से कोशिश अक्सर जज्बातों कि सोच दिलाती है लहरों को इशारों कि पहचान सहारा देती है बदलावों को एहसासों कि समझ सुनाती है।

किनारों से कोशिश अक्सर अंदाजों कि सौगात दिलाती है उजालों को सपनों कि लहर आस देती है इशारों को आशाओं कि समझ सुनाती है।

किनारों से कोशिश अक्सर राहों कि अहमियत दिलाती है नजारों को उम्मीदों कि पहचान इरादा देती है कदमों को अदाओं कि समझ सुनाती है।

किनारों से कोशिश अक्सर दास्तानों कि परख दिलाती है अदाओं को अरमानों कि पुकार सौगात देती है आवाजों को राहों कि समझ सुनाती है।

किनारों से कोशिश अक्सर अल्फाजों कि मुस्कान दिलाती है अंदाजों को बदलावों कि सोच आस देती है तरानों को अरमानों कि समझ सुनाती है।

किनारों से कोशिश अक्सर एहसासों कि सोच दिलाती है आशाओं को नजारों कि सुबह दास्तान देती है अंदाजों को खयालों कि समझ सुनाती है।

किनारों से कोशिश अक्सर कदमों कि आहट दिलाती है अदाओं को तरानों कि सौगात सरगम देती है आशाओं को बदलावों कि समझ सुनाती है।

किनारों से कोशिश अक्सर राहों कि पहचान दिलाती है खयालों को अरमानों कि पुकार अल्फाज देती है कदमों को उजालों कि समझ सुनाती है।

Friday, 7 October 2022

कविता. ४५८७. सपनों कि लहर अक्सर।

                                        सपनों कि लहर अक्सर।

सपनों कि लहर अक्सर अदाओं कि कोशिश संग सरगम सुनाती है दास्तानों को एहसासों कि पुकार रोशनी दिलाती है लम्हों को खयालों कि सुबह सुनाती है।

सपनों कि लहर अक्सर नजारों कि सोच संग पहचान सुनाती है जज्बातों को कदमों कि आहट अल्फाज दिलाती है दिशाओं को बदलावों कि सुबह सुनाती है।

सपनों कि लहर अक्सर आशाओं कि उमंग संग अहमियत सुनाती है तरानों को उम्मीदों कि आस पहचान दिलाती है नजारों को राहों कि सुबह सुनाती है।

सपनों कि लहर अक्सर आवाजों कि धून संग परख सुनाती है उजालों को बदलावों कि सोच अरमान दिलाती है इशारों को अंदाजों कि सुबह सुनाती है।

सपनों कि लहर अक्सर राहों कि पुकार संग खयाल सुनाती है लम्हों को आशाओं कि सरगम कोशिश दिलाती है उम्मीदों को किनारों कि सुबह सुनाती है।

सपनों कि लहर अक्सर इरादों कि कोशिश संग आस सुनाती है तरानों को अरमानों कि राह अफसाना दिलाती है उमंग को राहों कि सुबह सुनाती है।

सपनों कि लहर अक्सर अंदाजों कि सौगात संग राह सुनाती है लम्हों को खयालों कि पुकार रोशनी दिलाती है लहरों को नजारों कि सुबह सुनाती है।

सपनों कि लहर अक्सर जज्बातों कि मुस्कान संग आवाज सुनाती है उम्मीदों को कदमों कि आस सरगम दिलाती है एहसासों को दास्तानों कि सुबह सुनाती है।

सपनों कि लहर अक्सर दिशाओं कि समझ संग अरमान सुनाती है तरानों को अरमानों कि सोच किनारा दिलाती है कदमों को अदाओं कि सुबह सुनाती है।

सपनों कि लहर अक्सर आवाजों कि सरगम संग पुकार सुनाती है अफसानों को अंदाजों कि सौगात खयाल दिलाती है उम्मीदों को इशारों कि सुबह सुनाती है।

Thursday, 6 October 2022

कविता. ४५८६. उमंग के संग आशाओं कि।

                                          उमंग के संग आशाओं कि।

उमंग के संग आशाओं कि लहर अफसाना दिलाती है कदमों को अदाओं कि परख कोशिश सुनाती है राहों को अंदाजों कि सौगात सरगम सुनाती है।

उमंग के संग आशाओं कि सौगात कोशिश दिलाती है दिशाओं को खयालों कि समझ सपना सुनाती है तरानों को अरमानों कि मुस्कान सरगम सुनाती है।

उमंग के संग आशाओं कि सुबह दास्तान दिलाती है लहरों को इशारों कि पहचान नजारा सुनाती है उजालों को आवाजों कि धून सरगम सुनाती है।

उमंग संग आशाओं कि सोच किनारा दिलाती है राहों को नजारों कि सोच अल्फाज सुनाती है बदलावों को लहरों कि तलाश सरगम सुनाती है।

उमंग संग आशाओं कि परख खयाल दिलाती है लम्हों को किनारों कि मुस्कान पहचान सुनाती है अदाओं को तरानों कि सुबह सरगम सुनाती है।

उमंग संग आशाओं कि सौगात इशारा दिलाती है उजालों को बदलावों कि समझ एहसास सुनाती है कदमों को आशाओं कि पुकार सरगम सुनाती है।

उमंग संग आशाओं कि मुस्कान रोशनी दिलाती है सपनों को अरमानों कि पुकार अरमान सुनाती है जज्बातों को अंदाजों कि आस सरगम सुनाती है।

उमंग संग आशाओं कि तलाश पहचान दिलाती है लहरों को इशारों कि रोशनी सोच सुनाती है किनारों को उजालों कि सुबह सरगम सुनाती है।

उमंग संग आशाओं कि अदा कोशिश दिलाती है नजारों को राहों कि अहमियत अफसाना सुनाती है तरानों को उम्मीदों कि लहर सरगम सुनाती है।

उमंग संग आशाओं कि रोशनी आस दिलाती है अंदाजों को खयालों कि सौगात तलाश सुनाती है लम्हों को दास्तानों कि परख सरगम सुनाती है।

Wednesday, 5 October 2022

कविता. ४५८५. दास्तानों को दिशाओं कि।

                                   दास्तानों को दिशाओं कि।

दास्तानों को दिशाओं कि रोशनी इशारा देती है कदमों को अदाओं कि आहट सुबह दिलाती है खयालों संग उजालों कि सौगात तराना देती है।

दास्तानों को दिशाओं कि समझ सरगम देती है किनारों को सपनों कि कोशिश सोच दिलाती है लम्हों संग जज्बातों कि मुस्कान तराना देती है।

दास्तानों को दिशाओं कि सुबह एहसास देती है नजारों को कदमों कि आहट आवाज दिलाती है उम्मीदों संग इशारों कि राह तराना देती है।

दास्तानों को दिशाओं कि परख पहचान देती है अंदाजों को उजालों कि पुकार रोशनी दिलाती है आशाओं संग अरमानों कि सोच तराना देती है।

दास्तानों को दिशाओं कि लहर कोशिश देती है आशाओं को बदलावों कि पहचान नजारा दिलाती है लहरों संग अदाओं कि परख तराना देती है।

दास्तानों को दिशाओं कि कोशिश सहारा देती है लहरों को किनारों कि समझ सरगम दिलाती है नजारों संग आशाओं कि सुबह तराना देती है।

दास्तानों को दिशाओं कि मुस्कान अल्फाज देती है खयालों को उम्मीदों कि आस अफसाना दिलाती है दिशाओं संग अंदाजों कि समझ तराना देती है।

दास्तानों को दिशाओं कि राह अरमान देती है नजारों को इरादों कि सौगात अल्फाज दिलाती है कदमों संग खयालों कि पहचान तराना देती है।

दास्तानों को दिशाओं कि तलाश सहारा देती है जज्बातों को कदमों कि आहट अरमान दिलाती है लम्हों संग आशाओं कि सरगम तराना देती है।

दास्तानों को दिशाओं कि पुकार सौगात देती है दिशाओं को अंदाजों कि आस अफसाना दिलाती है एहसासों संग इरादों कि राह तराना देती है।


Tuesday, 4 October 2022

कविता. ४५८४. इशारों पर एहसासों कि।

                               इशारों पर एहसासों कि।

इशारों पर एहसासों कि रोशनी कोशिश देती है अंदाजों से किनारों कि मुस्कान दास्तान दिलाती है आशाओं को बदलावों कि लहर सहारा देती है।

इशारों पर एहसासों कि समझ सरगम देती है खयालों से आशाओं कि सरगम सोच दिलाती है लम्हों को अफसानों कि रोशनी सहारा देती है।

इशारों पर एहसासों कि सौगात किनारा देती है लहरों से जज्बातों कि सुबह पहचान दिलाती है अदाओं को तरानों कि सोच सहारा देती है।

इशारों पर एहसासों कि परख सपना देती है नजारों से उजालों कि सौगात कोशिश दिलाती है अरमानों को दिशाओं कि समझ सहारा देती है।

इशारों पर एहसासों कि कहानी अंदाज देती है तरानों से उम्मीदों कि तलाश इरादा दिलाती है कदमों को बदलावों कि पुकार सहारा देती है।

इशारों पर एहसासों कि आस पहचान देती है कदमों से अंदाजों कि आस अफसाना दिलाती है नजारों को खयालों कि कहानी सहारा देती है।

इशारों पर एहसासों कि दास्तान आवाज देती है किनारों से अदाओं कि परख कोशिश दिलाती है उम्मीदों को कदमों कि आहट सहारा देती है।

इशारों पर एहसासों कि राह अल्फाज देती है खयालों से उम्मीदों कि पहचान दास्तान दिलाती है लहरों को नजारों कि सोच सहारा देती है।

इशारों पर एहसासों कि सरगम कहानी देती है उम्मीदों से सपनों कि परख रोशनी दिलाती है कदमों को अदाओं कि अहमियत सहारा देती है।

इशारों पर एहसासों कि उमंग पहचान देती है नजारों से लहरों कि सुबह कोशिश दिलाती है उजालों को बदलावों कि रोशनी सहारा देती है।

Monday, 3 October 2022

कविता. ४५८३. अल्फाजों कि मुस्कान अक्सर।

                                     अल्फाजों कि मुस्कान अक्सर।

अल्फाजों कि मुस्कान अक्सर इशारों कि सौगात कोशिश दिलाती है इरादों से उजालों कि सुबह किनारा देती है कदमों कि आहट से एहसास सुनाती है।

अल्फाजों कि मुस्कान अक्सर उम्मीदों कि लहर अरमान जगाती है आशाओं से जज्बातों कि सोच नजारा देती है राहों कि पुकार से एहसास सुनाती है।

अल्फाजों कि मुस्कान अक्सर खयालों कि आस सहारा जगाती है अंदाजों से लम्हों कि पुकार रोशनी देती है अदाओं कि परख से एहसास सुनाती है।

अल्फाजों कि मुस्कान अक्सर नजारों कि सोच मुस्कान जगाती है तरानों से दिशाओं कि अहमियत कोशिश देती है खयालों कि समझ से एहसास सुनाती है।

अल्फाजों कि मुस्कान अक्सर अंदाजों कि सरगम आस जगाती है लम्हों से आवाजों कि धून पहचान देती है किनारों कि सोच से एहसास सुनाती है।

अल्फाजों कि मुस्कान अक्सर दास्तानों कि परख बदलाव जगाती है लहरों से अंदाजों कि सौगात राह देती है इशारों कि सुबह से एहसास सुनाती है।

अल्फाजों कि मुस्कान अक्सर लम्हों कि पहचान जगाती है इरादों से अदाओं कि परख सहारा देती है दास्तानों कि रोशनी से एहसास सुनाती है।

अल्फाजों कि मुस्कान अक्सर उम्मीदों कि सरगम जगाती है सपनों से खयालों कि सोच पहचान देती है आवाजों कि सोच से एहसास सुनाती है।

अल्फाजों कि मुस्कान अक्सर राहों कि पुकार जगाती है नजारों से उम्मीदों कि पुकार रोशनी देती है जज्बातों कि पहचान से एहसास सुनाती है।

अल्फाजों कि मुस्कान अक्सर उजालों कि सुबह जगाती है दिशाओं से तरानों कि लहर परख देती है अंदाजों कि आहट से एहसास सुनाती है।

Sunday, 2 October 2022

कविता. ४५८२. तरानों संग आशाओं कि।

                                         तरानों संग आशाओं कि।

तरानों संग आशाओं कि लहर एहसास दिलाती है लम्हों को खयालों कि समझ पहचान दिलाती है जज्बातों से अदाओं कि पुकार कोशिश संग राह दिलाती है।

तरानों संग आशाओं कि मुस्कान सपना दिलाती है नजारों को आवाजों कि धून सहारा दिलाती है उजालों से बदलावों कि सोच पहचान संग राह दिलाती है।

तरानों संग आशाओं कि परख सुबह दिलाती है उम्मीदों को किनारों कि मुस्कान दास्तान दिलाती है लम्हों से इशारों कि सौगात रोशनी संग राह दिलाती है।

तरानों संग आशाओं कि कोशिश पहचान दिलाती है दास्तानों को अदाओं कि परख सौगात दिलाती है आशाओं से अंदाजों कि सुबह सरगम संग राह दिलाती है।

तरानों संग आशाओं कि सौगात किनारा दिलाती है खयालों को अंदाजों कि आस अरमान दिलाती है नजारों से सपनों कि समझ एहसास संग राह दिलाती है।

तरानों संग आशाओं कि सोच इशारा दिलाती है अंदाजों को किनारों कि मुस्कान अफसाना दिलाती है आवाजों से इरादों कि सोच उमंग संग राह दिलाती है।

तरानों संग आशाओं कि पुकार सहारा दिलाती है लम्हों को दास्तानों कि सोच एहसास दिलाती है उजालों से दिशाओं कि समझ सौगात संग राह दिलाती है।

तरानों संग आशाओं कि सरगम मुस्कान दिलाती है नजारों को दिशाओं कि अहमियत आस दिलाती है जज्बातों से आवाजों कि धून दास्तान संग राह दिलाती है।

तरानों संग आशाओं कि लहर सोच दिलाती है उम्मीदों को एहसासों कि पुकार रोशनी दिलाती है इशारों से खयालों कि सोच पहचान संग राह दिलाती है।

तरानों संग आशाओं कि आस अरमान दिलाती है उजालों को सपनों कि सौगात एहसास दिलाती है लम्हों से उम्मीदों कि समझ खयाल संग राह दिलाती है।

Saturday, 1 October 2022

कविता. ४५८१. कदमों को नजारों कि।

                                        कदमों को नजारों कि।

कदमों को नजारों कि सोच समझ देती है नजारों को दिशाओं कि समझ कोशिश देकर जाती है उजालों से मुस्कान कि सोच सरगम सुनाती है।

कदमों को नजारों कि सौगात सुबह देती है आशाओं को बदलावों कि सोच सरगम देकर जाती है इशारों से खयाल कि पहचान सरगम सुनाती है।

कदमों को नजारों कि पहचान पुकार देती है दास्तानों को एहसासों कि समझ सपना देकर जाती है इरादों से आस कि सोच सरगम सुनाती है।

कदमों को नजारों कि राह तलाश देती है तरानों को उम्मीदों कि लहर अरमान देकर जाती है आशाओं से बदलावों कि सौगात सरगम सुनाती है।

कदमों को नजारों कि परख रोशनी देती है राहों को अंदाजों कि आस तलाश देकर जाती है आवाजों से किनारों कि मुस्कान सरगम सुनाती है।

कदमों को नजारों कि लहर एहसास देती है आवाजों को अदाओं कि समझ इशारा देकर जाती है अंदाजों से लम्हों कि पुकार सरगम सुनाती है।

कदमों को नजारों कि समझ खयाल देती है दिशाओं को नजारों कि सोच अफसाना देकर जाती है इशारों से किनारों कि सौगात सरगम सुनाती है।

कदमों को नजारों कि आस मुस्कान देती है एहसासों को राहों कि तलाश कोशिश देकर जाती है जज्बातों से लहरों कि खयाल सरगम सुनाती है।

कदमों को नजारों कि उमंग पहचान देती है किनारों को उजालों कि पहचान पुकार देकर जाती है नजारों से लम्हों कि रोशनी सरगम सुनाती है।

कदमों को नजारों कि सौगात तलाश देती है आशाओं को बदलावों कि परख रोशनी देकर जाती है दिशाओं कि समझ सरगम सुनाती है।



कविता. ५४६६. आशाओं की सरगम संग।

                            आशाओं की सरगम संग। आशाओं की सरगम संग लहर‌ इशारा दिलाती है अदाओं को सपनों की पुकार सौगात दिलाती है तरानों को उजाल...