Tuesday, 2 September 2025

कविता. ५६१८. अदाओं से जुडकर।

                              अदाओं से जुडकर।

अदाओं से जुडकर आवाजों की धून कोशिश दिलाती है उजालों की सुबह संग नजारों की तलाश जज्बात दिलाती है उम्मीद की सोच दिलाती है।

अदाओं से जुडकर अंदाजों की पुकार अल्फाज दिलाती है कदमों की धून संग दास्तानों की राह पहचान दिलाती है आस की सोच दिलाती है।

अदाओं से जुडकर दिशाओं की महफिल रोशनी दिलाती है किनारों की मुस्कान संग अदाओं की समझ अहमियत दिलाती है रोशनी की सोच दिलाती है।

अदाओं से जुडकर अरमानों की सुबह लहर दिलाती है इरादों की पहचान संग खयालों की आवाज सरगम दिलाती है उमंग की सोच दिलाती है।

अदाओं से जुडकर जज्बातों की दास्तान इशारा दिलाती है किनारों की समझ संग नजारों की सौगात एहसास दिलाती है बदलाव की सोच दिलाती है।

अदाओं से जुडकर नजारों की परख अरमान दिलाती है राहों की अहमियत संग दिशाओं की रोशनी तराना दिलाती है आहट की सोच दिलाती है।

अदाओं से जुडकर आशाओं की लहर तलाश दिलाती है कदमों की पुकार संग दास्तानों की महफिल सपना दिलाती है उजाले की सोच दिलाती है।

अदाओं से जुडकर इरादों की पहचान मुस्कान दिलाती है सपनों की आस संग कदमों की कहानी अफसाना दिलाती है तलाश की सोच दिलाती है।

अदाओं से जुडकर तरानों की उमंग खयाल दिलाती है जज्बातों की रोशनी संग बदलावों की पुकार अरमान दिलाती है मुस्कान की सोच दिलाती है।

अदाओं से जुडकर उम्मीदों की समझ सहारा दिलाती है तरानों की आहट संग एहसासों की कोशिश आवाज दिलाती है अंदाजों की सोच दिलाती है।

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