Tuesday, 29 March 2022

कविता. ४३९६. जज्बात अक्सर उजालों कि सुबह के संग।

                                   जज्बात अक्सर उजालों कि सुबह के संग।

जज्बात अक्सर उजालों कि सुबह के संग दास्तानों कि पहचान सुनाते है लम्हों कि सौगात संग मुस्कान को पुकार दिलाती है कदमों कि आहट अफसाना देती है।

जज्बात अक्सर उजालों कि सुबह के संग कदमों के अरमान सुनाते है लहरों कि पुकार संग आशाओं को अल्फाज दिलाती है दिशाओं कि उमंग अफसाना देती है।

जज्बात अक्सर उजालों कि सुबह के संग दिशाओं कि उमंग सुनाते है आशाओं कि कोशिश संग नजारों को परख दिलाती है लम्हों कि सरगम अफसाना देती है।

जज्बात अक्सर उजालों कि सुबह के संग तरानों कि राह सुनाते है अंदाजों कि परख संग आवाजों को धून दिलाती है नजारों कि अहमियत अफसाना देती है।

जज्बात अक्सर उजालों कि सुबह के संग लहरों कि पुकार सुनाते है उम्मीदों कि सोच संग खयालों को सपना दिलाती है राहों कि तलाश अफसाना देती है।

जज्बात अक्सर उजालों कि सुबह के संग नजारों कि आस सुनाते है कदमों कि पहचान संग दास्तानों को पुकार दिलाती है किनारों कि सोच अफसाना देती है।

जज्बात अक्सर उजालों कि सुबह के संग आवाजों कि धून सुनाते है इशारों कि मुस्कान संग अंदाजों को राह दिलाती है कोशिश कि परख अफसाना देती है।

जज्बात अक्सर उजालों कि सुबह के संग राहों कि तलाश सुनाते है रोशनी कि सौगात संग दिशाओं को बदलाव दिलाती है तरानों कि पुकार अफसाना देती है।

जज्बात अक्सर उजालों कि सुबह के संग आशाओं के लम्हे सुनाते है आवाजों कि धून संग अल्फाजों को रोशनी दिलाती है खयालों कि उम्मीद अफसाना देती है।

जज्बात अक्सर उजालों कि सुबह के संग एहसासों कि आवाज सुनाते है तरानों कि राह संग बदलावों को पुकार दिलाती है नजारों कि सरगम अफसाना देती है।

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