Saturday, 12 March 2016

कविता ५५५. सतरंगी दुनिया

                                                सतरंगी दुनिया
सात रंगों से ही दुनिया कि बहार बनती है जो जीवन को खुशियों कि सौगाद देती है हर रंग मे ही हमारी किस्मत बनती है जिससे हमे साँसे मिलती है
हर रंग मे ही जीवन कि धारा बन पाती है जो हमे नई शुरुआत देती है हर रंग मे ही तो जीवन कि कहानी रंगीन होती है
रंगों मे हर पल नया एहसास जिन्दा होता है जिससे हमारी दुनिया बनती है हर रंग मे जीवन का अलग एहसास जिन्दा होता है
उन सतरंगी एहसासों को जीना हमारी आदत होती है हर रंग मे अलग मुस्कान होती है जिसमे खुशियों कि लहर हर बार जिन्दा होती है
रंगों मे ही जीवन को मतलब देनेवाली सौगाद होती है जो हमारे जीवन कि जरुरत होती है जो जीवन कि कहानी हर मोड पर होती है
रंगों मे ही तो हमारी दुनिया बसती है जो जीवन कि नई शुरुआत और नई धून होती है जो जीवन का संगीत बनकर जीवन मे आगे जाती है
रंगों मे ही तो हमारी किस्मत रहती है जो जीवन को नई शुरुआत होती है उन रंगों से ही जीवन कि कहानी बनती है जो हमे ताकद देती है
हर रंग मे जीवन कि ताकद होती है उन रंगों को समझ लेने कि चाहत तो है पर जीवन मे उन्हे जीने के सिवा किसी चीज कि फुरसत कहाँ है
पर रंगीन ही जीवन कि हर बाजी होती है जीते चाहे हारे दोनों से ही हमारी कहानी बन पाती है हमारी दुनिया बन जाती है
किसी रंग को समझ या ना समझे रंग हम पर असर हर बार जरूर कर जाते है क्योंकि वही तो उन रंगों कि आदत होती है फिदरत होती है
कभी हमे उनसे चाहत होती है तो कभी नफरत होती है पर उन्हे जीने कि हमे हर बार जरुरत होती है वही हमारे जीवन कि चाहत होती है

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