Sunday, 7 February 2016

कविता ४८६. राहों पर बिना सोचे चलना

                                                          राहों पर बिना सोचे चलना
राहों पर चलना ही जीवन में मजा देता है जीवन को परख लेने की चाहत बिना चलना भी कभी कभी मन को भाता है राहों में हर बार अलग अलग रंग होते है
जिन्हे समझ लेना ही तो जीवन को साँसे देता है हमे जीना है जीवन में तो अलग अलग तरीके से जीना होता है उसे समझ लेना मन में मजा देता है
तो कभी कभी उसे बिना समझे हमे जीवन समझ जाता है कभी कभी उसे बिना परखे ही जीवन उम्मीदे दे जाता है जीवन को जीना जरुरी होता है
जीवन में जीते जीते ही हर बार मजा आता है जीवन को परख लेना ही नई रोशनी दे जाता है जीवन को परख लेना ही तो हमे आगे ले जाता है
जीवन के अंदर हमे नई सोच की ही ताकद हर बार होती है जो जीवन को हर कदम नई उम्मीदे देती है हमे जीवन को समझ लेने की जरूरत होती है
पर हर बार हमे जीवन को समझ लेने की जरूरत नहीं होती है हमारी जिन्दगी आसानी से आगे निकल जाती है जब हम कोई नई चीज समझ लेते है
पर नई चीजे बिना समझे हमे कर देनी होती है तो ही हम उस ओर पहूँच लेते है जीवन में कई बाते हमे करनी होती है क्योंकि वही जीवन में नयापन देती है
नई बाते तो जीवन में आती जाती है उन्हें समझ लेना ही उन्हें करने के बाद ही आती है जीवन को समझ लेना उसकी सच्ची जरूरत होती है
जीवन में खुशियाँ हर बार नई उम्मीदे देती है पर कुछ चीजे बिना डरे भी करनी होती है उन चीजों को परख लेने की जीवन में हर बार जरूरत होती है
जीवन में आगे जाने की जरूरत तो हर बार होती है क्योंकि आगे बढ़ने से ही हमारी किस्मत हर बार और हर मोड़ पर बनती है तो कभी कभी बिना समझे ही आगे जाने की जरूरत पड़ती है 

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