Thursday, 7 January 2016

कविता ४२५. पानी और हवा

                                                 पानी और हवा
पानी के भीतर जीवन जिन्दा होता है हवाओं के साथ वह हमे मतलब देता है हर बार हमेशा जीवन मे वह प्यास कम करता है पानी ही जीवन बनकर एहसास जगाता है
जीवन को हर बारी जो हिस्सा उम्मीदे दे जाता है उसे समज लेना जीवन हर बार अहम पाता है जीवन को हर हिस्से से समज लो तो उम्मीदे दे जाता है
वह जीवन को नई तरीके से आगे ले जाता है ताकद दे जाता है पानी हो या हवा हो वह हिस्सा हर बार अहम नजर आता है वह हर पल हमे जीवन मे आगे ले जाता है
जीवन को हर हिस्से मे समज लो तो वह साँसे दे जाता है जीवन के अंदर हर बार वह नई उम्मीद जगाता है जो हम समज ले वही जीवन का हिस्सा वह हमे बताता है
पर हमने जो ना समजा हो वह जीवन का किस्सा भी हर बार अहम होता है जीवन को जो साँसे दे वह किस्सा हर बार रोशनी देता है अगर पानी और हवा को समज लो तो उसमे जीवन नजर आता है
जब कुदरत मे अलग अलग एहसास हर बार उम्मीद दे जाता है जीवन को मतलब तो वही एहसास दे जाता है जो जीवन कि हर धारा मे नया एहसास दे जाता है
कुदरत के अंदर जीवन मे नई सोच और उम्मीद वही एहसास लाता है जो जीवन को हर मोड पर ताकद दे जाता है कुदरत का कुछ हिस्सा जो हमे मतलब हर बार दे जाता है
अलग एहसास जो हम समज ले तो वह जीवन को रोशनी दे जाता है कुदरत का एक हिस्सा हर बार किस्सा नया बताता है जो जीवन को हर बार मतलब दे जाता है
जो अहम जरुरत होती है उनसे ही तो जीवन अहम नजर आता है उनसे ही तो जीवन हर बार हमे ताकद दे जाता है जो जरुरी होता है वही तो जीवन को सही राह दे जाता है
पानी और हवा के अंदर जीवन को मतलब मिलता है जो हमे हर बार हर एक मोड पर खुशियाँ दे जाता है जीवन मे हमारे हर बार मतलब कुछ अलग ही जिन्दा हो जाता है

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