Tuesday, 31 May 2016

कविता ७१५. बारीश और बिजली

                                          बारीश और बिजली
बारीश कि आवाज जब कानों मे गुँजती है जीवन कि नई ख्वाईश जीवन को नई साँसे देती है मुस्कान तो तब आसानी से जीवन मे आती रहती है
जब साँसे हमे जीवन दे तब दुनिया बदलती है बारीश कि आहट से ही जीवन कि कश्ती अलग किनारे को लगती है दिशाए बदलती है
आसमान मे बादलों कि एक अलग ही जबान बनती है जिन्हे देखकर लगता है वह कोई कहानी हर पल कहती रहती है सोच देती रहती है
पर बारीश के बादल जब कोई एहसास दिखाते है तब उन एहसास को समझकर दुनिया बदलती है दिशाए बदलती रहती है
बारीश के बूँदों कि कहानी हर बार बदलती है जो जीवन को समझकर आगे चलती है पर उसे सुनने कि फुरसत बिजली कहाँ देती है
जब आसमान को बादल के अंदर कई तरह कि सोच दिखती है पर बिजली के अंदर आवाज कि अलग सोच हर पल रहती है
कभी बादलों के रंगों से बेहतर बिजली आवाज और चमक बनती है जो बादलों कि दुनिया हर पल बदलकर आगे चलती है
बारीश कि सोच को समझकर ही तो दुनिया बदलती है हमे जीवन कि शुरुआत हर पल मे मिलती है उस सोच मे जीवन कि कहानी बदल जाती है
बारीश मे अक्सर जीवन कि ताकद हर बार जीवन को मतलब देकर आगे चलती है जीवन कि सोच हमारी किस्मत हर पल बदलती है
हमे बिजली से ज्यादा कभी कभी कोई बात नही दिखती है पर बिना बादलों के कहाँ बरसात हो सकती है जो जीवन मे अहम होती है

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