Tuesday 7 July 2015

कविता ५७. मतलब राह का

                                                             मतलब राह का
उन सारे ख्वाबों को उनमे हम जीना चाहते है वह हर ख्वाब हमें कुछ कहता  है जिस में हम जिन्दा रहते है 
पर जब  राह सोचकर ही चुनना क्युकी राह ही जिन्दगी तय करती है हर मोड़ पर हस देते है और राह ही 
नयी नयी सोच को जिन्दा करती है पर सही तो बस वही राह है जिस पर हमारी उम्मीद जिन्दा रहती है 
राह परखो या तुम समजो पर राह सही चीज दिखाती है वह चीज़ जिस में कई तरह की सोच होती है 
उसे उम्मीदों से तो बांधा करते है क्युकी वही सोच जिस में हम जीते है उसमे जिन्दगी को जिया करते है 
हर सोच बार बार यही कहती है जिन्दगी रोज नया इम्तिहान लेती है पर इसका मतलब तो यह नहीं होता है 
जिसमे सोच को गलत मोड़ में मुड़ने दे जब हम सही राह पर चलते रहे है तो हर बार हम समजने लगे है 
राह को समजना बड़ा अहम है दोस्तों क्युकी आखिर राह पर हमे नयी सोच मिलती है पर अगर रास्ते गलत है 
तो जिन्दगी को समजना इतना ना मुश्किल होगा जब सोच को ही गलत कर दो तो हर जिन्दगी का हर फैसला गलत होता है 
पर कभी कभी जब आगे सही सोच से बढ़ते है और राह का हर किस्सा गलत होता है तो समज लो इन राहों को क्युकी उस राह को चुनने का फैसला भी गलत होता है 
माना की जिन्दगी में कई मुश्किलें होगी पर गलत राह से बेहतर भी तो कोई राह होगी अगर सही इन्सान ही गलत राह चुने तो सोचो दुनिया की क्या मंजिल होती है 
सही सोच के साथ सही राह भी जरुरी होगी क्युकी उन राहों में ही जिन्दगी की कोई मंजिल होगी जब हम राह को चुनते है 
अक्सर वह जरुरी होता है क्युकी राह ही तो सही गलत का हिस्सा होती है सिर्फ सही सोच काफी नहीं है दोस्तों हमारी सही राह भी जिन्दगी का किस्सा होती है 

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