Wednesday, 2 September 2015

कविता १७१. उड़ने के पंख

                                                                     उड़ने के पंख
पंख लगाकर अगर उड़ जाते तो बस आसमान में ही घूमते रहते है पर उड़ना तो जरुरी होता हर बार बस आजादी जरुरी होती है
शायद जिनके लिए जीवन आगे बढ़ना जरुरी होता है पंख जो हमें ताकद देते है उड़ने की कोशिश करते क्युकी आजादी हमें देते है
वही चीज़ हमें भाती है आजादी तो एक हवा है जो अक्सर जीवन मे मजा देती है उड़ने को ताकद देती है जब जब आजादी मिलती है
उसके अंदर जीवन में मन आजादी देता है तो खुशियाँ मन को तस्सली देती है पर हर बार आजादी देता है जो उपर उड़ता है
हर बार आसमान को छूने की कोशिश तो चाह आजादी की होती है जीवन में आजादी मन को नयी तमन्ना देती है आजाद पंछी तो वह होता है
खुशियाँ जिसकी बस उड़ने में होती है वह उड़ना चाहता है बंदिशों से दूर उसकी खुशियाँ बस ऊँचाई छूने में होती है आजाद पंछी तो वह होता है
जो हर पल उड़ता रहता है उसे कोई समजे या ना समजे वह बस अपनी दिशा चुनता है आजादी तो उस सोच में है जिसे जीत की परवाह न हो
आजादी तो उस उम्मीद में है जिसे किसी चीज़ का मोह ना हो जब कुछ चाहो तो उस चाहत में आजादी खोती है चीज के पीछे दौड़नेवाले आजादी क्या पाते है
उड़ते रहने की बाते जो मन को छू लेती है उनके अंदर ही सोच हमेशा खुशियाँ देती है उड़ना तो चाहत जीवन की हमेशा होती है
पर कभी लोग चीज़ों को इतना चाहते है की आजादी खो जाती है जीवन में आजादी की चाहत वह ताकद है जो खुशियाँ हर बार दे देती है
पंख तो उस ऊँचाई के लिए है जो जीवन को खुशियाँ हर पल दे देती है मन में नयी उम्मीद हर बार जगा के देती है आजादी देती है 

2 comments:

  1. kitne achhe likhte hai....................

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    1. शुक्रिया शुभ प्रभात

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