Friday, 18 September 2015

कविता २०२. जीवन का किस्सा

                                      जीवन का किस्सा
जब जीवन मे हम आगे बढ़ जाते है अलग अलग तरह के क़िस्से जीवन मे आ जाते है जिन्हें हर पल हम समज लेना चाहते है उन किस्सों के सहारे जीवन को हम आगे बढा लेते है
जीवन मे अलग सोच को हम अक्सर रखते है जिन्हें परख लेते है पर जीवन मे हमेशा उन्हें समज लेना चाहते है जीवन के अंदर हम अलग अलग तरह के क़िस्से समज लेते है
हर क़िस्से मे हम जीवन को अक्सर जिन्दा रख लेते है पर सवाल तो यह है कि जीवन के अंदर नये क़िस्से जीवन को दिलचस्प बनाते है या फिर उन किस्सों के मतलब जीवन ही देता है
बड़ा मुश्किल है उन्हें बातों को समज पाना जो जीवन को मक़सद देती है वह बातें ही तो जीवन को हर बार जिन्दा कर लेती है पर हर राह पर जीवन कि नयी सोच हम हमेशा रखते है
उस सोच को अक्सर क़िस्से ही बनाते है हर बार हमेशा हम अपनी सोच कि धारा को समज लेते है उस जीवन धारा मे ही तो क़िस्से जिन्दा रहते है क़िस्से अक्सर जीवन को बनाते है
तो क्या आगे है और क्या पीछे है जीवन को तो हम हर मोड़ पर अलग सोच रखते है जीवन मे हम अलग तरह कि सोच हम हमेशा रखते है क़िस्से जीवन के अलग अलग रूप रखते है
जीवन कि हर धारा मे अलग अलग सोच हम रखते है जीवन के अंदर हम हमेशा अलग सोच को जिन्दा रखते है नई सोच जीवन के अंदर किस्सों से ही तो पाते है
हर क़िस्से के अंदर नई चीज़ें ज़रूर होती है क़िस्से ही तो जीवन को बनाते है क़िस्से के अंदर हम दुनिया को समज लेते है हर किस्सा नई चीज़ें हमे नया मोड़ दिखाते है
किस्सों मे जीवन के अलग अलग रंग बनते है कुछ क़िस्से ही है जो जीवन को हर बार बनाते है क़िस्से तो जीवन को मतलब देते है पर किस्सों को जीवन ही मौका देते है
किस्सा हर बार हमे जीवन देता है किस्सों को समज लेने से ही इन्सान आगे बढ़ता है हम किस्सों से ही जिन्दा रहते है तो जी लो हर क़िस्से को क्योंकि उस क़िस्से से ही हम जिन्दा रहते है

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