Sunday, 20 December 2015

कविता ३८८. बहार के अंदर कि उम्मीद

                                        बहार के अंदर कि उम्मीद
बहार के अंदर उम्मीदे हर बार होती है उस बहार को समज ले तो दुनिया मतलब दे जाती है बहार ही तो जीवन को शुरुआत दे जाती है बहार जीवन मे रोशनी लाती है
पर बहार का इंतजार जीवन मे मतलब नही दे पाता है वह जीवन कि रोशनी हर बार छिन के ले जाता है बहार का मतलब जीवन मे नया एहसास दे जाता है
बहार के अंदर माना कि रोशनी होती है पर बस उन्हे ढूँढते रहने से दुनिया बदल जाती है बहार के भीतर अलग दुनिया आती है बहार तो अपनी दुनिया जिन्दा रखती है
बहार के अंदर ही दुनिया बसती है पर बिना बहार के भी जीवन कि धारा जिन्दा होती है बहार के तलाश मे रहने से दुनिया अधूरीसी लगती है वह शुरुआत देती है
जीवन को बहार तो हर बार उम्मीद देती है बहार के अंदर अलग अलग सोच जो जीवन मे नई पेहचान तो देती ही है जीवन मे कभी बहार  मुश्किल होती है
बहार मे जीवन कि उम्मीद होती है उसमे बहार से ज्यादा अलग अलग एहसास होता है बहार जीवन मे असर हर बार लाती है उम्मीद भी बहारों से हर बार जीवन मे आती है
जीवन को बहार हर कदम उम्मीद देती है जीवन मे मुसीबते तो आती रहती है पर बहार से ज्यादा जीवन मे मुश्किले भी होती है बहार से लढने से ही उम्मीदे आगे बढती है
बहार के इंतजार मे जिन्दगी नही कट पाती है मुश्किल चीजे जो उम्मीदे देती है पर सिर्फ जीवन मे मतलब हर बार देती है वह रोशनी गमों को अपना लेने से हर बार मिलती है
बहार के अंदर जो बाते होती है वह कभी मुश्किल जीवन मे आती जाती रहती है बहार से ज्यादा मुश्किलों से लढने कि जीवन मे हर बार जरुरत होती है
बहार के अंदर ही जीवन कि जरुरत होती है पर बहार के इंतजार से ज्यादा जरुरत जीवन मे हर बार आगे बढने कि हर मोड पर हर बार होती है जो रोशनी देती है

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